बिहारशरीफ , 1 मार्च (आईएएनएस)। बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति विजय पांडुरंग भाटकर ने बुधवार को यहां कहा कि वह एक ऐसी संस्था बनाना चाहते हैं जो छात्रों को केवल एक विश्वविद्यालय की डिग्री पाने के लिए ही नहीं बल्कि अपने समाज और समुदाय की आकांक्षाओं को भी पूरा करने के लिए प्रेरित करे।
नालंदा विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में गैर-आवासीय भवनों के शिलान्यास पर आयोजित समारोह में भाग लेने यहां पहुंचे नालंदा विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति ने कहा, “प्राचीन नालंदा का महत्व ज्ञान के क्षितिज को नया विस्तार देकर विश्व को बौद्धिक रूप से समृद्ध बनाने में ही नहीं बल्कि वैश्विक मानवतावाद जो प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की विरासत है, को आगे बढ़ाना है।”
डॉ़ भाटकर ने कहा, “मैं अपने आप को अत्यंत भाग्यशाली मानता हूं कि मैं इस ऐतिहासिक दिन और इस पवित्र समारोह का एक हिस्सा हूं। जब मैंने पहली बार विश्वविद्यालय का वास्तु देखा तो मुझे ऐसा लगा कि यह वैसा ही है जैसा मेरी कल्पना में था। मुझे विश्वास है कि जब यह पूरा होगा तो इसका रूप सही मायने में पुन: प्रवर्तित हो जाएगा।”
प्रस्तावित परिसर के मास्टर प्लान में आवासीय और गैर-आवासीय भवनों का भी डिजाइन है। गैर-आवासीय भवनों में एकेडमिक ब्लॉक, लाइब्रेरी, प्रशासन ब्लॉक, व्याख्यान कक्ष और सभागार शामिल हैं। आवासीय भवनों में पुरुषों और महिलाओं के लिए हॉस्टल और शिक्षकों के आवास के साथ भोजन कक्ष सहित कई कक्ष भी शामिल हैं।
सभी इमारतें पूरे परिसर में फैले पानी के नेटवर्क के साथ जुड़े होंगे। परिसर के बीच एक तालाब होगा, जिसको ‘कमल सागर’ के नाम से जाना जाएगा। यह एकेडमिक रीढ़ और आवासीय ब्लॉक से जुड़ा रहेगा।
इस मौके पर नालंदा के जिलाधिकारी एस़ एम़ थिंगराजन, पुलिस अधीक्षक कुमार आशीष सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय के कार्यवाहक रजिस्ट्रार क़े चंद्रमूर्ति ने इस अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन दिया।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 25 जनवरी को भाटकर को इस पद पर नियुक्त किया था।
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