कॉमेडी करना भावनात्मक दृश्यों से ज्यादा मुश्किल : संजय दत्त (साक्षात्कार)

नई दिल्ली, 4 मार्च (आईएएनएस)। बॉलीवुड के ‘मुन्नाभाई’ यानी संजय दत्त की जिंदगी हर लिहाज से किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही है। हथियार रखने के जुर्म में जेल की सजा काटने से लेकर मादक पदार्थो की लत और उससे बाहर निकलने तक उनकी जिंदगी हमेशा विवादों से घिरी रही है। लेकिन अपने प्रशंसकों के दिल में वह एक खास जगह बनाने में कामयाब रहे हैं।

नई दिल्ली, 4 मार्च (आईएएनएस)। बॉलीवुड के ‘मुन्नाभाई’ यानी संजय दत्त की जिंदगी हर लिहाज से किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही है। हथियार रखने के जुर्म में जेल की सजा काटने से लेकर मादक पदार्थो की लत और उससे बाहर निकलने तक उनकी जिंदगी हमेशा विवादों से घिरी रही है। लेकिन अपने प्रशंसकों के दिल में वह एक खास जगह बनाने में कामयाब रहे हैं।

संजय जेल से बाहर आने के बाद फिर से बॉलीवुड में वापसी करने जा रहे हैं। इतने लंबे समय के बाद वापसी को लेकर घबराहट के सवाल पर संजय ने आगरा में एक बातचीत में कहा, “किसी प्रकार की कोई घबराहट नहीं है, कोई साइकल चलाना भूलता है क्या, यह भी ऐसा ही है।”

संजय एक माहिर और सफल अभिनेता हैं। उन्होंने ‘खलनायक’ से लेकर ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ तक में अपनी कॉमेडी से तो दर्शकों का मनोरंजन किया ही है, साथ ही उन्होंने भावनात्मक दृश्यों में भी अपनी छाप छोड़ी है। मगर उन्हें भावनात्मक दृश्यों को निभाना अधिक चुनौतीपूर्ण लगता है या कॉमेडी, यह पूछे जाने पर संजय ने आईएएनएस से कहा, “यकीनन कॉमेडी करना सबसे ज्यादा मुश्किल होता है, क्योंकि इसमें कॉमिक टाइमिंग पर ध्यान देना होता है, जो काफी मुश्किल होता है।”

संजय निर्देशक उमंग कुमार की फिल्म ‘भूमि’ के साथ बॉलीवुड में वापसी कर रहे हैं। ‘भूमि’ में दर्शकों को क्या खास और क्या अलग देखने को मिलेगा, इस सवाल पर संजय ने कहा, “हर फिल्म का ढांचा एक जैसा होता है, चाहे वह ‘मदर इंडिया’ हो, ‘दंगल’ या कोई अन्य फिल्म, लेकिन उसे किस प्रकार पेश किया जा रहा है, यह उसे अलग और खास बनाता है।”

संजय के हर किरदार ने एक अलग छाप छोड़ी है, क्या उन्हें भरोसा है कि ‘भूमि’ का उनका किरदार भी उनके अन्य किरदारों से अलग और एक खास छाप छोड़ पाएगा और क्या इस फिल्म से भी उन्हें अपने प्रशंसकों की जादू की झप्पी मिलेगी? इस सवाल पर उन्होंने कहा, “आप किसी किरदार की दूसरे किरदार से तुलना ही नहीं कर सकते। मुझे पूूरा भरोसा है कि भूमि भी दर्शकों को उतनी ही पसंद आएगी, जितनी ‘मुन्नाभाई..’ या अन्य फिल्में पसंद आई थीं।”

संजय ने अपने करियर की लंबी पारी में विभिन्न प्रकार की भूमिकाएं निभाई हैं और अभिनय की दुनिया में वह एक रोल मॉडल बन गए हैं। ऐसे में करियर के इस मुकाम पर पहुंचने के बाद क्या कुछ ऐसा है जो उन्हें और बेहतर कुछ नया करने को प्रेरित करता है, या उनके अभिनय को धार देता है, यह पूछे जाने पर संजय ने कहा, “आप चाहे जितने भी प्रकार के किरदार निभाएं और जिस भी शैली के किरदार निभाएं, लेकिन सीखने की प्रक्रिया जारी रहती है, आप हर लम्हे से कुछ नया सीखते हैं। आप अपनी हर फिल्म, अपने साथी कलाकारों और अपने हर निर्माता और निर्देशक से कुछ नया सीखते हैं। सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती।”

‘भूमि’ एक पिता और बेटी के रिश्ते पर आधारित फिल्म है। इसकी कहानी एक आम इंसान की कहानी है, जो आगरा शहर में रहता है, अपने परिवार से प्यार करता है और जब मुश्किल में पड़ता है, तो किस प्रकार वह उसका सामना करता है।

संजय को भी अपनी जिंदगी में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उन्हें अपनी पहली ही फिल्म का प्रीमियर भी उस हालात में करना पड़ा था, जब उनकी मां के निधन को ज्यादा समय नहीं हुआ था। अपने जीवन के उस भावनात्मक रूप से कठिन दौर को याद करते हुए संजय ने बताया, “उस समय अपने पहली फिल्म के प्रीमियर के लिए किसी भी अभिनेता के मन में जो उत्साह होता है, वह मन में नहीं था। लेकिन हमें अपने काम से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। ऐसे में मेरे पिता ने मुझसे कहा कि मैं उनके लिए एक कुर्सी आरक्षित रखूं, ताकि वह जहां भी हों, उनकी मौजूदगी और आशीर्वाद मुझे मिलता रहे।”

संजय को फिल्म उद्योग में आए 40 साल से ज्यादा हो चुके हैं, बॉलीवुड में उनका अनुभव कैसा रहा, इस सवाल पर संजय ने कहा कि बतौर अभिनेता उनकी यात्रा बेहद शानदार रही। बॉलीवुड उनके परिवार की तरह है। उन्होंने जेल में रहने के दौरान भी हर लम्हे में अपने इस परिवार को याद किया।

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