भोपाल, 4 मार्च (आईएएनएस)। भारत सरकार की पूर्व स्वास्थ्य सचिव सुजाता राव ने कहा है कि देश में स्वास्थ्य जैसा महत्वपूर्ण विषय बिना किसी विजन और स्पष्ट नीति के चलाया जा रहा है।
मध्यप्रदेश की राजधानी में जन स्वास्थ्य अभियान की ओर से डॉ. अजय खरे की स्मृति में आयोजित व्याख्यान माला में शनिवार को राव ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सबसे ज्यादा उपेक्षित है। चिकित्सा शिक्षा में निजीकरण पर पूरी तरह से लगाम लगनी चाहिए। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश को जरूरी बताया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए जवाहर लाल विश्वविद्यालय दिल्ली की डॉ. इमराना कदीर ने कहा, “जन स्वास्थ्य का मुद्दा केवल महंगे अस्पतालों, आधुनिक तकनीकी और स्वास्थ्य की ढांचागत व्यवस्था तक ही सीमित नहीं है। यह लोगों की आजीविका से जुड़ा मुद्दा है। भारत में बड़ी आबादी गरीबी और सामाजिक आर्थिक रूप से पिछड़ेपन का शिकार है।”
उन्होंने कहा कि जरूरी पोषण का अभाव, जीवन जीने की परिस्थितियों पर भी पड़ता है। ऊपर से स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार निजी हाथों की तरफ खिसकते जाने से स्थिति और खराब होती जा रही है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो़ उदय जैन कहा कि स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य शिक्षा सरकार का मूल दायित्व है, परंतु सरकार इस दायित्व से दूर जा रही है और निजीकरण को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।
इससे पहले जनस्वास्थ्य अभियान एवं मंथन अध्ययन केंद्र द्वारा मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य की स्थिति पर कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश में जनस्वास्थ्य के मुद्दों पर कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं, संगठनों ने भागीदारी की।
कार्यशाला में मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण, मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य, दवा परीक्षण, दवाओं की उपलब्धता, व्यावसायिक स्वास्थ्य आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई साथ ही आगे की रणनीति पर बातचीत हुई।
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