धर्मशाला, 10 मार्च (आईएएनएस)। निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री लोबसांग सांगय ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय तिब्बती प्रशासन सीटीए 2018 में निर्वासन के 60 वर्ष पूरे होने पर दुनिया के प्रति, खासतौर से भारत के प्रति आभार वर्ष मनाएगा।
धर्मशाला, 10 मार्च (आईएएनएस)। निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री लोबसांग सांगय ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय तिब्बती प्रशासन सीटीए 2018 में निर्वासन के 60 वर्ष पूरे होने पर दुनिया के प्रति, खासतौर से भारत के प्रति आभार वर्ष मनाएगा।
उन्होंने चीन सरकार से मांग की है कि भेदभावपूर्ण नीतियां समाप्त की जाएं, तिब्बतियों को यात्रा दस्तावेज जारी किए जाएं और तिब्बत के अंदर और बाहर उनकी आवाजाही का सम्मान किया जाए।
सांगय ने कहा, “कशग मंत्रिमंडल वर्ष 2017 को अभियान वर्ष के रूप में मना रहा है। वर्ष 2018 तिब्बतियों के निर्वासन के 60 साल पूरे होने का वर्ष होगा।”
उन्होंने तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस की 58वीं बरसी पर यहां कहा, “इसलिए हम 2018 को दुनिया भर की सरकारों और लोगों के प्रति, खासतौर से भारत के प्रति अपना गहरा आभार जाहिर करने के वर्ष के रूप में मनाएंगे।”
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1959 में 10 मार्च को चीनी सैनिकों ने ल्हासा में तिब्बती विद्रोह को कुचल दिया था, और उसके कारण दलाई लामा तथा 80,000 से अधिक तिब्बतियों को भारत व अन्य देशों में निर्वार्सित होना पड़ा था।
सांगय ने तिब्बत से संबंधित नीतियों की समीक्षा करने और तिब्बती लोगों पर हू याओबांग द्वारा लागू की गई उदार नीतियों पर फिर से गौर करने का चीनी नेतृत्व से अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल की 2015/2016 की रपट में तिब्बती मठों पर प्रतिबंध बढ़ाए जाने की ओर इशारा किया गया है।
सांगय ने एक बयान में कहा है कि वर्ष 2016 की फ्रीडम हाउस रपट में तिब्बत को राजनीतिक और नागरिक अधिकारों की बुरी स्थिति के मामले में सीरिया के बाद दूसरा स्थान दिया गया है।
सांगय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर बधाई देते हुए कहा, “हम नए विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन के उस आश्वासन से उत्साहित हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि ट्रंप प्रशासन तिब्बत की लड़ाई को समर्थन जारी रखेगा, परम पावन दलाई लामा का स्वागत करता रहेगा और बीजिंग व निर्वासित तिब्बती सरकार/दलाई लामा के प्रतिनिधियों के बीच संवाद को लगातार प्रोत्साहित करता रहेगा।”
सांगय ने पिछले वर्ष दिसंबर में कहा था कि यूरोपीय संसद ने तिब्बत पर एक आवश्यक प्रस्ताव को मंजूरी देकर, तिब्बती प्रतिनिधियों के साथ मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद बहाली का आह्वान कर तिब्बत के मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की है।
ईयू के इस आवश्यक प्रस्ताव में लारंग गार को ढहाए जाने की निंदा की गई है।
पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री सांगय ने कहा कि 33 वर्षीय ताशी राबतेन द्वारा हाल में किया गया आत्मबलिदान और अतीत में 144 तिब्बतियों के आत्मबलिदान दमन और ज्यादती के सबूत हैं।
निर्वासित तिब्बती प्रशासन देश के उत्तरी हिस्से में धर्मशाला में स्थित है।
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