उन्होंने कहा, “बदहाली की कगार पर खड़े किसानों के हक पर यह कुठराघात है। अब उच्च न्यायालय के आदेश से भाजपा के आरोपों की पुष्टि हो गई है। भाजपा सरकार के गठन के साथ ही किसानों की सरकार किसानों के कर्जमाफी की प्रक्रिया प्रारंभ कर देगी।”
मनीष ने कहा, “किसान कर्ज के बोझ से दबा हुआ है, बैंको और साहूकारों को ब्याज देकर उसकी आर्थिक कमर टूट चुकी है और अखिलेश सरकार चीनी मिलों पर किसानों के ब्याज को माफ करने का निर्णय कर लेती है। दुर्भाग्य है कि चीनी मिलों के ऊपर कर्ज किसानों का है, ब्याज का अधिकार किसानों का है और उसे माफ प्रदेश सरकार द्वारा किया जाता है। यह सरासर किसानों के अधिकारों का अतिक्रमण है और अखिलेश सरकार की किसान विरोधी सोच का प्रमाण है।”
प्रदेश प्रवक्ता ने कहा, “किसान और विकास विरोधी नीति के चलते ही जनता ने अखिलेश सरकार की विदाई की दस्तक दे दी है। शनिवार को परिणाम विदाई सुनिश्चित कर देंगे। अखिलेश सरकार की नीति और नियत पर हर बार न्यायालय ने अंकुश लगाया है। लेकिन सरकारी नौकरियों में पक्षपात, अवैध खनन, महिला उत्पीड़न, कब्जे, लूट, दुष्कर्म तथा भय की अपनी मूल प्रवृत्ति से अखिलेश सरकार कभी पृथक नहीं हो सकी और यही कारण उसकी विदाई का आधार बना।”
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