नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को बुधवार को राज्य सभा में उस वक्त असहजता का सामना करना पड़ा, जब वित्त विधेयक, 2017 को लोकसभा में लौटाने से पहले विपक्ष द्वारा प्रस्तावित पांच संशोधनों को स्वीकार कर लिया गया।
पिछले सप्ताह पारित विधेयक को सोमवार को राज्यसभा में पारित होने के लिए पेश किया गया था।
संसद के ऊपरी सदन ने विधेयक पर पांच घंटों से अधिक समय तक चर्चा की, जो दो दिनों तक चली।
कांग्रेस सदस्य दिग्विजय सिंह ने विधेयक के तीन अनुच्छेदों के लिए संशोधन पेश किया, जिसे मतविभाजन के बाद स्वीकार कर लिया गया, जिसके कारण सत्तापक्ष को असहजता का सामना करना पड़ा।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सदस्य सीताराम येचुरी ने भी तीन संशोधन पेश किए, जिन्हें भी मतविभाजन के बाद स्वीकार कर लिया गया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर राज्यसभा को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा कि विधेयक के कुछ प्रावधान से देश का संघीय ढांचा कमजोर होता है।
सिब्बल ने यह भी कहा कि विधेयक कर अधिकारियों को बेहिसाब शक्तियां प्रदान करता है, जिससे वे किसी भी परिसर की तलाशी कर सकते हैं।
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