अमिताभ ने 30 जनवरी को डीजीपी जावीद अहमद को पत्र लिखकर कहा था कि इन दोनों मामलों में स्थानीय पुलिस पर भारी राजनैतिक दवाब है, जिस कारण दोनों मामलों में थाने से डीजीपी तक बार-बार शिकायत करने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी और सीजेएम लखनऊ के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमे भारी हीलाहवाली की जा रही है।
डीजीपी कार्यालय ने 6 फरवरी को इन मामलों की जांच एसटीएफ से कराने की संस्तुति की थी। सत्ता परिवर्तन होते ही राज्य सरकार ने 17 मार्च के गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र के आदेश द्वारा इन दोनों मुकदमों की विवेचना सीबी-सीआईडी को दे दी, जिसके क्रम में यह विवेचना अब सीबी-सीआईडी के लखनऊ सेक्टर द्वारा की जा रही है।
25 सितंबर, 2016 को उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा कराई गई आबकारी सिपाही परीक्षा के दूसरे सत्र के पेपर लीक का मुकदमा थाना विभूतिखंड और 27 नवंबर, 2016 को उत्तर प्रदेश संघ लोक सेवा आयोग द्वारा कराई गई समीक्षा अधिकारी की प्रारंभिक परीक्षा की द्वितीय पाली के पेपर लीक का मुकदमा थाना हजरतगंज में दर्ज किया गया था।
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