अमरावती, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश में रविवार को किए गए मंत्रिमंडल फेरबदल व विस्तार के बाद सत्तारूढ़ तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) में असंतोष खुलकर सामने आ गए हैं। मंत्रिमंडल से निकाले गए और इसमें शामिल नहीं किए गए नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है, जिसका कई अन्य विधायकों ने भी समर्थन किया है।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को किए गए मंत्रिमंडल फेरबदल में पांच पुराने चेहरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया, जबकि 11 नए मंत्रियों को अपनी सरकार में शामिल किया, जिनमें उनके बेटे नारा लोकेश भी शामिल हैं।
जिन नेताओं को मंत्रिमंडल से निकाला गया, उनमें तेदेपा के वरिष्ठ नेता रहे बी. गोपालकृष्णा रेड्डी भी शामिल हैं, जिन्होंने विरोधस्वरूप विधानसभा से इस्तीफा दे दिया।
एक अन्य विधायक चिंतामणेनी प्रभाकर ने भी इस्तीफे की घोषणा की है, जिन्हें मंत्रिमंडल विस्तार में जगह नहीं मिल पाई।
गोपालकृष्ण रेड्डी ने अपना इस्तीफा आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कोडेला शिवप्रसाद राव और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को भेज दिया है। वह नायडू द्वारा निकाले गए पांच मंत्रियों में शामिल हैं।
मंत्रिमंडल में जिन 11 नए सदस्यों को शामिल किया गया है, उनमें विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से तेदेपा में आए तीन विधायक भी हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री के इस कदम ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं व पुराने वफादारों को नाराज कर दिया। उन्हें लगता है कि दलबदलुओं को मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए उनकी उपेक्षा की गई।
नायडू ने विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से तेदेपा में आए अमरनाथ रेड्डी को मंत्रिमंडल में जगह देने के लिए गोपालकृष्णा रेड्डी का पत्ता साफ कर दिया, जिनके पास वन विभाग था।
नायडू के दोस्त गोपालकृष्ण रेड्डी पूर्व में अविभाजित आंध्र प्रदेश में भी मंत्री के रूप में सेवा दे चुके हैं। दोनों चित्तूर जिले के रहने वाले हैं।
साल 2003 में जब तिरुपति के नजदीक नक्सलियों ने भूमिगत सुरंग बिछाकर नायडू को निशाना बनाने की कोशिश की थी तो गोपालकृष्ण रेड्डी भी इसमें घायल हो गए थे।
नायडू को जब गोपालकृष्ण रेड्डी के इस्तीफे के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने उनसे इस्तीफा वापस लेने के लिए फोन पर बात की और उन्हें समझाने का प्रयास किया।
मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने से नाराज प्रभाकर ने भी विधानसभा से इस्तीफे की घोषणा की।
एक अन्य विधायक बी. बोज्जी ने भी प्रभाकर को समर्थन देने की घोषणा की है।
गुटूंर से वरिष्ठ नेता डी. नरेंद्र भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज हैं। सूत्रों के अनुसार, विधायक ने शनिवार को नायडू से मुलाकात कर पार्टी के प्रति अपनी वफादारी का हवाला देते हुए मंत्री पद मांगा था। उन्होंने नायडू को याद दिलाया कि पार्टी जब विपक्ष में थी तब भी वह इसके प्रति वफादार बने रहे।
बड़ी संख्या में नरेंद्र के समर्थक उनके साथ एकजुटता दिखाने के लिए उनके घर के पास एकत्र हुए।
विजयवाड़ा से तेदेपा विधायक बोंडा उमा ने भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के बाद पार्टी से इस्तीफे की घोषणा की। हालांकि उन्होंने नायडू द्वारा मुलाकात के लिए बुलाए जाने के बाद अपना इरादा बदल लिया।
उमा ने कहा कि नायडू ने पार्टी की सेवा करने वालों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दे पाने पर खेद जताया है।
तेदेपा की विधायक अनीता ने भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने पर नाखुशी जताई है।
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