उन्होंने कहा कि 2022 में आजादी मिले हुए 75 साल पूरे हो जाएंगे। 75वें स्वतंत्रता दिवस के लिए हर नागरिक को संकल्प लेना चाहिए। आजादी के लिए लड़ने वाले लोगों के सपनों को पूरा करने के लिए सभी देशवासियों को कुछ करना चाहिए। जो जिस क्षेत्र में है, जिस काम से जुड़ा है, उसी में 2022 तक कुछ विशेष करने का प्रण लेना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के अधिकांश स्वतंत्रता सेनानी का बैकग्राउंड कोर्ट ही रहा है। राष्ट्रपिता का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी ने पूरे देश में लोगों के दिलों में आजादी के लिए जज्बा पैदा कर दिया था। गांधी कहते थे कि अगर सरकार को कोई निर्णय लेने में परेशानी हो रही तो अंतिम व्यक्ति के बारे में सोचना चाहिए।
मोदी ने कहा कि आजादी के दीवानों का सपना पूरा करने का काम देशवासियों का है। आजादी के 75 साल पूरे होने पर देश को एक नए मुकाम पर ले जाना है, इसके लिए हर किसी को संकल्प लेना होगा।
प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज से 50 साल पहले राधाकृष्णण यहां आए थे। कानून को लेकर उन्होंने अहम बातें कही थी। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा था कि कानून लोगों के स्वभाव के अनुरूप होना चाहिए। कानून का लक्ष्य सभी का कल्याण का होना चाहिए।
मोदी ने कहा, “चीफ जस्टिस खेहर ने दिल की बात कही है। उनकी बातों को मैंने मन से सुनी है। चीफ जस्टिस की बातों में काफी दर्द झलका है। कानून सिर्फ अमीरों के लिए नहीं होना चाहिए, इसका लक्ष्य अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव होना चाहिए।”
उन्होंने संभावना जताई कि यह समारोह नई ऊर्जा, नए संकल्प के पूरा होने का अवसर बनेगा। साथ ही आदलत में तकनीक के जमकर प्रयोग का सुझाव दिया।
मोदी ने यह भी बताया कि वर्ष 2014 में जब वह चुनाव प्रचार कर रहे थे, तब किसी बात पर उन्होंने कहा था कि वह हर दिन एक अनुपयोगी कानून खत्म करेंगे। इसी पर पहल करते हुए अब तक करीब 1200 कानून खत्म किए जा चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई क्यों नहीं हो सकती? एसएमएस से लोगों को मुकदमों की जानकारी क्यों नहीं दी जा सकती?
इलाहाबाद हाईकोर्ट को न्याय जगत का ‘तीर्थ’ बताते हुए मोदी ने कहा कि यहां से पूरा देश आजादी के 75 साल पूरे होने पर 2022 तक न्यू इंडिया के लिए रोडमैप तैयार करे। जो जहां है, वहां बेहतर करने का संकल्प ले। उन्होंने कहा कि देशवासी 2022 के लिए संकल्प लें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि क्यों न वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेशी हो, मुकदमों का बोझ कम करना जरूरी है। लोगों को एसएमएस से मुकदमों की तारीख मिले। कोर्ट और जेल के बीच वीडियो कांफ्रें सिंग से गवाही की व्यवस्था होनी चाहिए।
इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.बी. भोसले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व देश के प्रधान न्यायाधीश जे.एस. खेहर का स्वागत किया गया।
मंच पर मोदी के साथ उप्र के राज्यपाल राम नाईक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी, केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश दीपक मिश्र और इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीबी भोंसले और उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद थे।
इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल, न्यायमूर्ति अशोक भूषण, उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति विनीत सरन, कोलकाता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश तिवारी, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायमूर्ति वीएन खरे, मेघालय हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह, विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बीएस चैहान, राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एसआर आलम, लोकायुक्त जस्टिस संजय मिश्र शामिल हुए।
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