विशाल गुलाटी
विशाल गुलाटी
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र की हरित समिति के प्रमुख एरिक सोल्हेम ने भारत द्वारा ‘समावेशी हरित अर्थव्यवस्था’ की तरफ उठाए जा रहे कदमों को लेकर उसकी प्रशंशा करते हुए कहा है कि भविष्य में कम कर्बन उत्सर्जन से उसके अपने हित मजबूत होंगे।
रूस के अर्खागेल्स्क में आर्कटिक के विकास पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में उपस्थित सोल्हेम ने आईएएनएस से ईमेल के माध्यम से बातचीत में कहा, ” भारत में हम देख सकते हैं कि उसने समावेशी हरित अर्थव्यवस्था के पथ पर अग्रसर होने की शुरुआत की है, जो राजनीतिक और आर्थिक तौर पर गजब की चेतना दर्शाती है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के कार्यकारी निदेशक ने कहा कि भारत के पास नवीकरणीय क्षेत्र में विकास और वृद्धि करने की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने हालांकि इस बात को भी रेखांकित किया कि भारत कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है।
उन्होंने कहा, “करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने, दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा का समाधान करने तथा शहरी वायु प्रदूषण से निपटने की जरूरत है। समावेशी हरित अर्थव्यवस्था की तरफ आसानी से नहीं बढ़ा जा सकता है, क्योंकि यह बेहद चुनौतियों से भरा है।”
सोल्हेम ने देश के तमिलनाडु और केरल राज्यों में सौर ऊर्जा नवाचारों में वृद्धि की तरीफ करते हुए देश को इस महत्वपूर्ण संदेश को समझने की बात कही।
उन्होंने कहा “हम भारत में गैर-सरकारी क्षेत्र में भारी उछाल देख रहे हैं। सूचना तकनीक के क्षेत्र में भारत ने क्रांति की है और मुझे इसमें कोई कारण नजर नहीं आता कि उसे नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उसे ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए।”
नवीकरणीय संसाधनों की तरफदारी करते हुए यूएनईपी प्रमुख ने इस क्षेत्र को भविष्य और जीवाश्म ईंधनों को अब इतिहास बताया।
उन्होंने कहा कि नवाचार के माध्यम से हमने वायु और सौर बिजली का फायदा उठाया है और ऊर्जा का संचयन कर कीमतों में कमी ला रहे हैं। इन क्षेत्रों ने स्वयं को ऊर्जा सुरक्षा के साथ भारी मात्रा में रोजगार के अलावा, गुणवत्तापूर्ण रोजगार और अच्छे वेतन का रोजगार प्रदान करने वालों में स्थापित किया है।
उन्होंने कहा कि कोई भी देश या कंपनी इस नए चलन को दरकिनार नहीं कर सकती है।
सोल्हेम ने कहा, “जब बात कम कार्बन उत्सर्जन वाले भविष्य को अपनाने और हरित अर्थव्यवस्था की आती है, तब ट्रेन स्टेशन को पहले ही छोड़ देती है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि भारत और चीन जैसे देश इस मार्ग को केवल इसलिए नहीं अपना रहे हैं, क्योंकि उन्हें इसे दूसरों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है, बल्कि वे अपने हितों के लिए ऐसा कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “इसका अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि उनके नागरिक स्वच्छ हवा में सांस ले सकें। इसका अर्थ अर्थव्यवस्थाओं को धीरे-धीरे खड़ा करना और दीर्घकालिक संपदा सुनिश्चित करना है।”
अपना सारा जीवन पर्यावरण की लड़ाई में बिताने वाले सोल्हेम ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा एक महत्वपूर्ण आर्थिक मौका है, न कि किसी तरह की बाध्यता।
उन्होंने कहा, “मैं बताना चाहता हूं कि इस क्षेत्र में पर्याप्त वृद्धि की संभावना है और इस पर बने रहने के लिए मजबूत प्रोत्साहन भी।”
dharmpath.com dharmpath