नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने सोमवार को कहा कि ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप (टीपीपी) व्यापार समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद रिजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) व्यापार वार्ता साल 2018 से पहले जल्द से जल्द पूरी हो जानी चाहिए।
रजाक ने कहा, “आरसीईपी को पूरा करना अब हमारे लिए बेहद प्रासंगिक हो गया है। टीपीपी के खत्म होने से हमें इस क्षेत्र मे मुक्त व्यापार समझौते के लिए आरसीईपी की जरूरत है।”
रजाक यहां ‘इंडिया मलेशिया बिजनेस फोरम’ को संबोधित कर रहे थे, जिसे इंडस्ट्री चैंबर्स फिक्की, एसोचैम तथा सीआईआई ने मलेशियन इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ आयोजित किया था।
उन्होंने कहा, “हमें वार्ताकारों से आरसीईपी को इस साल के अंत तक या अगले साल के शुरुआत तक पूरा करने के लिए आग्रह करना चाहिए।”
16 सदस्यीय आरसीईपी में 10 एशियाई सदस्य – ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस, लाओस तथा वियतनाम – तथा उनके छह मुक्त व्यापार समझौता साझेदार-भारत, चीन, जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैंड शामिल हैं।
बीते 20 जनवरी को कार्यभार संभालने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टीपीपी समझौते से अपने कदम वापस खींच लिए, जिसे उसने जापान तथा 10 अन्य पैसिफिक-रिम (प्रशांत के किनारे) राष्ट्रों के साथ किया था।
टीपीपी को इतिहास का सबसे बड़ा क्षेत्रीय समझौता करार दिया गया था।
आरसीईपी समझौता साल 2015 में शुरू किया गया था।
इससे पहले कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत आरसीईपी समझौते पर रजाक के निर्देश का इंतजार कर रहा है।
सीतारमण ने कहा, “ऐसे वक्त में जब टीपीपी समाप्त हो चुका है तथा बहुपक्षीय समझौते से लोग पीछे हट रहे हैं, वैसे वक्त में आरसीईपी समझौते पर हम मलेशिया के साथ बातचीत कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “आरसीईपी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं तथा समस्त दक्षिणपूर्व एशियाई क्षेत्र को भारी लाभ होगा।”
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