गांधीनगर, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। गीता जौहरी को मंगलवार को गुजरात का पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया गया।
जौहरी की इस पद पर नियुक्ति तब हुई है, जब इस पद पर नियुक्त पी. पी. पांडेय ने एक दिन पूर्व पद छोड़ दिया, क्योंकि 2004 के इशरत जहां मुठभेड़ मामले में उनकी कथित संलिप्तता को लेकर उनकी नियुक्ति को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
1982 बैच की अधिकारी जौहरी गुजरात राज्य पुलिस आवास निगम की प्रबंध निदेशक के साथ-साथ डीजीपी का अतिरिक्त पदभार संभालेंगी। जौहरी राज्य की पहली आईपीएस अधिकारी भी हैं।
गुजरात में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं और जौहरी वर्ष के आखिर तक सेवानिवृत्त हो रही हैं।
इशरत जहां मामले में पिछले वर्ष जमानत पर रिहा होने के बाद पांडेय को डीजीपी का प्रभार सौंपा गया था। वह इसी वर्ष 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन उनका कार्यकाल अप्रैल के आखिर तक तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया था।
सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी जूलियो रिबेरो ने गुजरात उच्च न्यायालय में पांडेय की नियुक्ति को चुनौती दी थी और कहा था कि हत्या के मामले में आरोपी किसी अधिकारी को राज्य का पुलिस प्रमुख नहीं बनाया जा सकता।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पांडेय और अन्य लोगों पर साजिश रचने, अवैध तरीके से बंधक बनाने और हत्या करने के आरोप लगाए थे।
राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया था कि पांडेय को सिर्फ डीजीपी का प्रभार दिया गया है, जिसके बाद उच्च न्यायालय ने रिबेरो की याचिका खारिज कर दी थी।
इसके बाद पांडेय की नियुक्ति को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई और शीर्ष अदालत ने संकेत दिया था कि पांडेय को पद से हटाए जाने का आदेश दिया जा सकता है। शीर्ष अदालत के आदेश की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार ने वक्तव्य जारी कर बताया कि पांडेय ने खुद इस्तीफा दे दिया है।
60 वर्षीय जौहरी भी सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले की जांच के दौरान विवादों में रहीं और बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। उन पर सोहराबुद्दीन मामले की जांच में ढिलाई बरतने का आरोप लगा था, लेकिन बाद में अदालत ने उन पर लगे आरोप हटा दिए थे।
दोनों ही मामलों में दावा किया गया था कि मुठभेड़ में मारे गए व्यक्ति आतंकवादी थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रच रहे थे।
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