नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत और ब्रिटेन ने 12-12 करोड़ पाउंड का योगदान कर एक संयुक्त कोष स्थापित करने पर मंगलवार को सहमत हुए। इस कोष से भारतीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्त पोषण किया जाएगा।
केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने यहां संवाददाताओं से कहा, “आज (मंगलवार) राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। ब्रिटेन और एनआईआईएफ की भागीदारी में एक उप-कोष पर भी सहमति बनी।”
ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल के साथ 9वें भारत-ब्रिटेन आर्थिक और वित्तीय वार्ता के बाद जेटली मीडिया को संबोधित कर रहे थे। उनके साथ ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे ब्रिटिश वित्तमंत्री फिलिप हेमंड भी थे।
जेटली ने कहा, “ग्रीन ग्रोथ इक्विटी फंड में भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए वित्त पोषण हेतु दोनों देश 12-12 करोड़ पाउंड का योगदान करेंगे।”
वार्ता के अंत में एक संयुक्त बयान में कहा गया कि संयुक्त कोष का मकसद 50 करोड़ पाउंड की राशि जुटाना है। इसके लिए लंदन शहर के निजी क्षेत्र से भी भारतीय अवसंरचना परियोजनाओं के लिए निवेश लाया जाएगा।
भारत ने वाणिज्यिक रूप से संभव ग्रीनफिल्ड, ब्राउनफील्ड और स्टॉलेड परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए दिसंबर 2015 में एनआईआईएफ की स्थापना की थी।
दोनो मंत्रियों ने कहा कि ब्रिटेन के औपचारिक तौर पर यूरोपीय संघ (ईयू) छोड़ने के बाद किए जाने वाले मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा हुई। ब्रिटेन के ईयू छोड़ने की प्रक्रिया करीब दो साल में पूरी होने की उम्मीद है।
हेमंड ने कहा, “हम पहले की सफलता को मजबूत करने और नए क्षेत्रों की पहचान कर साथ काम कर सकते हैं। हम ब्रिटेन के ईयू छोड़ने के साथ भारतीय साथियों के साथ काम करने की तैयारी कर रहे हैं। इसे लेकर भारत और ब्रिटेन के बीच एफटीए पर गहरी चर्चा जारी है।”
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