छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मंगलवार रात जिला पंचायत बीजापुर के सभाकक्ष में समीक्षा बैठक में कहा कि बीजापुर जिले के साप्ताहिक हाट-बाजारों में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों के टीकाकरण के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं, जिससे जिले में टीकाकरण की दिशा में अच्छी सफलता मिल रही है।
रमन सिंह ने कहा, “बीजापुर जिले के इस टीकाकरण मॉडल को बस्तर संभाग के शेष छह जिलों में भी अपनाया जाना चाहिए। बीजापुर जिले के ग्रामीण मिर्च की खेती में काम करने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश चले जाते हैं। उद्यानिकी विभाग उन्हें उनके ही गांव में मिर्च की खेती के लिए मदद करें।”
मुख्यमंत्री ने दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों में हल्बी और गोंडी बोलियों के जानकार युवाओं को चिह्नांकित कर उन्हें सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरक (मोटीवेटर) के रूप में प्रशिक्षित करने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने दोनों जिलों के कलेक्टरों को इसके लिए वहां के आजीविका (लाईवलीहुड) कॉलेजों में प्रशिक्षण शुरू करने के निर्देश दिए।
दंतेवाड़ा और बीजापुर के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक में डॉ. सिंह ने बीजापुर जिले के भैरमगढ़ को राजस्व अनुविभाग का दर्जा देने की भी घोषणा की और अधिकारियों को वहां नए कार्यालय के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का आदेश भी दिया। उन्होंने दोनों जिलों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे कार्यो की प्रशंसा की और कहा कि नक्सल प्रभावित दोनों जिलों में हो रहे विकास के कार्य पूरे देश के लिए मिसाल बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हल्बी और गोंडी बोलियां बस्तर संभाग में स्थानीय जनता के बीच काफी प्रचलित हैं। इन बोलियों में लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाए। बोलियों के जानकार युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाए। इन प्रेरकों को उचित मानदेय भी दिया जाएगा। ये प्रेरक हर महीने कम से कम 100 ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए तैयार करेंगे।”
dharmpath.com dharmpath