मुंबई, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। देश के केंद्रीय बैंक ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2017-18 की पहली द्वैमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख ऋण दर यानी रेपो रेट को 6.25 फीसदी पर बरकरार रखा है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो रेट में लगातार तीसरी बार कोई बदलाव नहीं किया है।
एमपीसी ने ब्याज दर में 25 आधार अंकों की कटौती की है। हालांकि, रिवर्स रेपो दर को बढ़ाकर छह फीसदी कर दिया है।
आरबीआई ने बयान जारी कर कहा, “एलएएफ (लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी) के तहत रिवर्स रेपो दर 6.0 फीसदी है जबकि एमएसएफ (मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी) दर और बैंक दर 6.50 फीसदी है।”
आरबीआई ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को चार फीसदी पर बनाए रखा है।
आरबीआई बयान के मुताबिक, “मौजूदा समय में महंगाई ग्राफ के आसपास जोखिम संतुलित हैं। महंगाई से जुड़े घटनाक्रमों पर करीब से और सतत नजर रखी जानी चाहिए।”
बयान के मुताबिक, “उत्पादन और मांग के बीच अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है। नतीजतन, मांग का दबाव बन सकता है।”
आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में समिति के सभी छह सदस्यों ने मौद्रिक नीतिगत फैसलों के पक्ष में वोट किया। बैठक के मिनट्स 20 अप्रैल को जारी होंगे। एमपीसी की अगली बैठक पांच जून और छह जून 2017 को होगी।
आरबीआई ने आठ फरवरी की मौद्रिक समीक्षा बैठक में भी ऋण दरों को 6.25 फीसदी को यथावत रखा था।
महंगाई बढ़ने की वजह से आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने की उम्मीदें थीं। महंगाई दर फरवरी में तीन साल के उच्चतम स्तर 6.55 फीसदी रही है जबकि खुदरा महंगाई दर 3.65 फीसदी रही थी।
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