नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली की एक सत्र अदालत ने गुरुवार को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के लापता छात्र नजीब अहमद के मामले में निचली अदालत द्वारा नौ विद्यार्थियों को लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाने के संबंध में अपना बयान दर्ज कराने के लिए अदालत में पेश होने के फैसले पर रोक लगा दी।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने दंडाधिकारी अदालत द्वारा 30 मार्च को दिए गए फैसले पर रोक लगा दी और 3 मई तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी।
सत्र न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने के बाद प्रधान महानगर दंडाधिकारी सुमित दास ने अपनी अदालत में लंबित मामले की सुनवाई चार मई तक के लिए स्थगित कर दी।
मुख्य महानगर दंडाधिकारी ने 30 मार्च को जेएनयू के नौ विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से छह अप्रैल को अदालत में पेश होने के लिए कहा था।
आरोपी विद्यार्थियों के वकील ने अदालत से कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार, लाई डिटेक्टर टेस्ट विधिमान्य नहीं है और जब तक कोई इसे स्वेच्छा से स्वीकार न करे अवैध माना जाएगा।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 22 दिसंबर, 2016 को दिल्ली पुलिस को आरोपी विद्यार्थियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाने का निर्देश दिया था।
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