रक्षा मंत्रालय गठित करेगा नवाचार संगठन

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। रक्षा के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी विकास और व्यावसायिक उद्देश्यों की पूर्ति करने वाले नवीन उत्पादों के विकास के लिए रक्षा मंत्रालय जल्द ही एक गैर मुनाफा संगठन रक्षा नवाचार संगठन (डीआईओ) का गठन करने जा रहा है। सूत्रों से यह जानकारी मिली।

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। रक्षा के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी विकास और व्यावसायिक उद्देश्यों की पूर्ति करने वाले नवीन उत्पादों के विकास के लिए रक्षा मंत्रालय जल्द ही एक गैर मुनाफा संगठन रक्षा नवाचार संगठन (डीआईओ) का गठन करने जा रहा है। सूत्रों से यह जानकारी मिली।

रक्षा इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां ‘भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड’ (बीईएल) और ‘हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड’ (एचएएल) मिलकर इसका गठन करेंगी।

रक्षा मंत्रालय ने पिछले वर्ष दिसंबर में रक्षा नवाचार कोष (डीआईएफ) के गठन को मंजूरी दे दी थी, जिसके अधीन ही डीआईओ का गठन होगा।

बीईएल के एक सूत्र ने आईएएनएस को बताया, “यह रक्षा मंत्रालय की पहल पर हो रहा है तथा बीईएल तथा एचएएल को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नया संगठन रक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशन में काम करेगा और नवाचार के लिए नए विचार एवं सुझाव प्रदान करेगा।”

कंपनी देश की रक्षा जरूरतों के हिसाब से नवीन उत्पादों एवं समाधानों के विकास के लिए आर्थिक मदद मुहैया कराएगी।

सूत्र के अनुसार, “अकादमी स्तर, मध्यम या लघु उद्योग, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों से आने वाले लोग हों चाहे अपना उद्यम शुरू करने की इच्छा रखने वाला कोई व्यक्ति, वह आर्थिक मदद के लिए डीआईओ का दरवाजा खटखटा सकता है।”

उन्होंने आगे बताया, “बीईएल और एचएएल रक्षा के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए धारा-8 के तहत गठित इस कंपनी को पांच-पांच करोड़ रुपये की राशि मुहैया कराएंगे। यह कंपनी इसी महीने शुरू कर दी जाएगी।”

भारतीय कंपनी अधिनियम की धारा-8 के तहत कला, संस्कृति, विज्ञान सहित किसी भी अन्य क्षेत्र में गैर मुनाफा कंपनी की स्थापना की जा सकती है।

गठित होने के बाद डीआईओ आर्थिक मदद चाहने वाले नवाचारों की समीक्षा के लिए किसी को अपना ‘नॉलेज पार्टनर’ बनाएगा।

चयनित नवाचारों को सिद्धांत प्रतिपादन के लिए आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी और उसके बाद जिन नवाचारों को विकसित करने के लिए चुना जाएगा, वह चयन प्रक्रिया के अगले चरण में जाएंगे।

जिन नवाचार उत्पादों का मॉडल सफलतापूर्वक विकसित कर लिया जाएगा, उनके व्यावसायिक उत्पादन के लिए भी आर्थिक मदद दी जाएगी।

सूत्र ने बताया, “अगर हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिलती है तो हम 100 करोड़ रुपये तक की आर्थिक मदद मुहैया कराई जा सकती है, जिसमें दोनों कंपनियां 50-50 करोड़ रुपये का मदद देंगी।”

डीआईए की एक कंपनी के तौर पर गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में कंपनी के बोर्ड में दो नामांकित निदेशक होंगे, जिनमें से एक बीईएल का और दूसरा एचएएल का प्रतिनिधित्व करेगा। नामित निदेशकों के चयन की प्रक्रिया भी अभी तैयार हो रही है।

भविष्य में डीआईओ का स्वतंत्र निदेशक भी हो सकता है।

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