नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह तथा अन्य के खिलाफ दर्ज धनशोधन के मामले में वीरभद्र सिंह को एक बार फिर सम्मन जारी किया है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
कांग्रेस नेता को धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपना बयान दर्ज करवाने के लिए 13 अप्रैल को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है।
जांच एजेंसी ने उन्हें पहले भी सम्मन जारी किया था, लेकिन उन्होंने सरकारी कार्यो का बहाना बनाते हुए जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने में खुद को अक्षम बताया था। एजेंसी मुख्यमंत्री की पत्नी प्रतिभा सिंह तथा बेटे विक्रमादित्य सिंह से पूछताछ कर चुकी है।
प्रवर्तन निदेशालय ने मामले में अप्रैल महीने के प्रथम सप्ताह में वीरभद्र सिंह का 27.28 करोड़ रुपये कीमत का फॉर्महाउस कुर्क कर लिया था।
जांच एजेंसी का यह कदम केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा कथित तौर पर 6.03 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित करने के मामले में वीरभद्र सिंह तथा अन्य के खिलाफ पिछले महीने आरोप पत्र दाखिल करने के बाद आया है।
राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने सोमवार को सीबीआई के आरोप पत्र पर विचार करने के लिए 24 अप्रैल की तारीख मुकर्रर की है।
23 सितंबर, 2015 को सीबीआई द्वारा एक प्राथमिकी दर्ज करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने पीएमएलए के तहत वीरभद्र सिंह के अलावा, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, जीवन बीमा निगम के एजेंट आनंद चौहान, उनके सहयोगी चुन्नी लाल, जोगिंदर सिंह घलता, प्रेम राज, लवन कुमार रोच, वकमुल्लाह चंद्रशेखर तथा राम प्रकाश भाटिया के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था।
प्राथमिक जांच में पाया गया कि साल 2009 से 2012 तक केंद्रीय मंत्री रहते हुए वीरभद्र सिंह ने 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जिकी की, जो कथित तौर पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक थी।
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