अपनी प्राथमिकता में स्वास्थ्य का मुद्दा शामिल करें राज्य : नड्डा

नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस की पूर्व संध्या पर मातृत्व स्वास्थ्य के संबंध में काम करने वाली संस्थान व्हाइट रिबन एलायंस फॉर सेफ मदरहुड इंडिया (डब्ल्यूआरएआई) ने भारतीय संसदीय संस्थान : जनसंख्या एवं विकास के सहयोग से ‘हमारा स्वास्थ्य, हमारी आवाज’ अभियान के तहत ‘मातृत्व स्वास्थ्य के लिए गुणवत्ता, समानता एवं सम्मान’ विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया।

इस कार्यक्रम में सोमवार को बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा शामिल हुए। उन्होंने कहा कि राज्यों को अपनी प्राथमिकता में स्वास्थ्य के मुद्दे को शामिल करनी चाहिए।

पूरे भारत से 1,43,556 ग्रामीण महिलाओं ने स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों से संबंधित एक याचिका पर हस्ताक्षर किया है, जो कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री को दी गई।

नड्डा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “केंद्र सरकार स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने का पूरा प्रयास कर रही है। मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम के तहत 26 करोड़ महिलाएं पंजीकरण करा चुकी हैं। सरकार स्पेशल चाइल्ड केयर यूनिट की व्यवस्था कर रही है ताकि जिन बच्चों को विशेष देखभाल की आवश्यकता है उनकी उचित देखरेख की जा सकें।”

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “हर राज्य के अपने-अपने राजनीतिक रुख के कारण इस संबंध में अलग-अलग विचार हैं। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में मेरे लिए किसी राज्य का नाम लेना उचित नहीं होगा , लेकिन राज्यों को देखना होगा कि वे अपनी क्षमता बढ़ाएं। उन्हें अपनी मानसिकता व धारणा में बदलाव लाना होगा। राज्य को अपनी प्राथमिकता में स्वास्थ्य को डालना होगा।”

इस मौके पर डब्ल्यूआरएआई की राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अपराजिता ने बताया कि 1,43,556 महिलाओं से जब उनकी जरूरत व मांगों के बारे पूछा गया तो 36 फीसदी महिलाओं ने विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे मुफ्त एंबुलेंस सेवा, ब्लड बैंक, प्रसव बाद उचित देखभाल की मांग की। 23 फीसदी महिलाओं ने अस्पताल कर्मियों द्वारा सम्मानजनक व्यवहार किए जाने जरूरत बताई। 20 फीसदी महिलाओं ने आशाकर्मियों और महिला चिकित्सकों की उचित रूप से उपलब्धता की मांग की।

उन्होंने कहा कि 16 फीसदी महिलाओं ने अस्पतालों में सफाई बनाए रखने, चार फीसदी ने मिलने वाली विभिन्न सेवाओं और अधिकारों के बारे में जानकारी दिए जाने और वहीं एक प्रतिशत ने हर घर में शौचालय के निर्माण, महिलाओं को रोजगार देने आदि की मांग की है।

डॉ. अपराजिता ने कहा कि महिलाओं को क्या सुविधाएं मिल रही हैं, इस बारे में उन्हें जागरूक किए जाने की आवश्यकता है। तभी वे इसका लाभ उठा सकेंगी।

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