संशोधित रक्षा खरीद मैनुअल जल्द जारी होगा

कोलकाता, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। संशोधित रक्षा खरीद मैनुअल (डीपीएम) में ‘स्वदेशीकरण परियोजना में दीर्घकालिक समर्थन समझौते’ को समायोजित किए जाने की संभावना है। मैनुअल के जल्द ही जारी होने की संभावना है।

डिप्टी डायरेक्टर जनरल, ईएम (बी), एमजीओ शाखा के ब्रिगेडियर रतन कुमार ने कहा, “डीपीएम समीक्षाधीन है और संशोधित मैनुअल के जल्द ही जारी होने की संभावना है। मैनुअल में कई प्रावधान हैं, जिन्हें संशोधित किया गया है, ताकि उद्योग रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) में आसानी से हिस्सा ले सकें।”

भारतीय सेना की मास्टर जनरल ऑफ ऑर्डिनेंस (एमजीओ) शाखा सेना की हथियार प्रणाली, वाहनों तथा उपकरणों की विस्तृत व्यूहरचना की संचालन स्तर पर तैयारी के लिए जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि उद्योगों को संशोधित मैनुअल के तहत सुविधा मिलेगी, ताकि वे स्वदेशीकरण परियोजनाओं में हिस्सा ले सकें, साथ ही संशोधित मैनुअल के माध्यम से उद्योगों की चिंताओं का समाधान करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

अधिकारी ने एमजीओ शाखा तथा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा संयुक्त तौर पर आयोजित रेमिकॉमईस्ट कार्यक्रम से इतर कहा कि एक बार रक्षा निर्माण के लिए बुनियादी ढांचा स्थापित करने के बाद उद्योगों की सबसे महत्वपूर्ण समस्या ऑर्डर की रही है।

सेना अधिकारी के मुताबिक, इस तरह की चिंताओं का समाधान निश्चित तरीके से किया जाएगा, जिसके लिए संशोधित मैनुअल में कुछ विशेष मामलों में दीर्घकालिक समर्थन समझौते (एलटीएसए) को समायोजित किए जाने की संभावना है।

उन्होंने कहा, “संशोधित रक्षा खरीद मैनुअल में एलटीएसए की व्यवस्था स्वदेशीकरण परियोजनाओं के लिए करने की संभावना है। इस तरह की व्यवस्था पहले नहीं थी और इस पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है।”

कुल मिलाकर, रक्षा क्षेत्र में मौजूदा समय में 40 फीसदी स्वदेशीकरण है और सरकार की योजना अगले पांच वर्षो में इसे बढ़ाकर 60 फीसदी करने की है। सरकार की आकांक्षा अगले 10 वर्षो में स्वदेशीकरण को 70 फीसदी तक पहुंचाने की है।

अधिकारी ने कहा कि नौसेना तथा भारतीय वायु सेना के लिए आयात का आंकड़ा सर्वाधिक है, जबकि इनके मुकाबले सेना के लिए ये आंकड़े कम हैं।

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