नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गो के किनारे 500 मीटर की दूरी तक शराब की दुकानें बंद किए जाने के फैसले से नाखुश होटल एवं रेस्तरां महासंघ (एफएचआरएआई) ने कहा है कि ‘वे इस संबंध में कानूनी समाधान’ तलाश रहे हैं।
एफएचआरएआई के सदस्य दिलीप सी. दातवानी ने कहा, “राजकोष को 200,000 करोड़ रुपये का घाटा और एक लाख से अधिक दुकानें बंद करना छोटी बात नहीं है। अगर इस प्रतिबंध से सही परिणाम हासिल होता तो हमें यह नुकसान उठाने में कोई हर्ज नहीं होगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि इससे इतनी बड़ी संख्या में नौकरियां जाएंगी और जो दूसरे नुकसान होंगे उसका कोई फायदा नहीं होगा। जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे पाया नहीं जा सकता।”
दिलीप का दावा है कि एफएचआरएआई दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा होटल संघ है।
दिलीप ने जहां सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के पीछे सही मंतव्य के प्रति सहमति व्यक्त की, वहीं यह भी कहा कि इस फैसले में अन्य संबंधित मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया।
दिलीप ने कहा, “आंकड़ों से साबित हो चुका है कि नियमों के सख्ती से पालन करवाने और शराब पीकर वाहन चलाने में विलोमानुपाती संबंध होता है, लेकिन शराब पीकर वाहन चलाने और होटलों की संख्या के बीच किसी तरह के संबंध के सबूत नहीं हैं। अन्यथा पूर्ण शराबबंदी लगा चुके बिहार और गुजरात में शराब पीकर वाहन चलाने के मामले ही नहीं होते। इतना ही नहीं इन दोनों राज्यों में शराब पीकर वाहन चलाते हुए दुर्घटना के अनगिनत मामले भी सामने आते रहते हैं। किसी भी देश में शराब पीकर वाहन चलाने पर रोकथाम लगाने के लिए होटल या रेस्तरां पर प्रतिबंध नहीं लगा होगा।”
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