गुवाहाटी, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। असम में शुक्रवार को राज्य के सबसे रंगीन त्योहार रोंगाली बीहू की धूमधाम और जश्न का माहौल है।
रोंगाली या बोहाग (बसंत) बीहू असमिया कैलेंडर के चोत महीने के आखिरी दिन शुरू होता है, जो आमतौर पर हर साल 13 या 14 अप्रैल को होता है। इसके पहले दिन को गोरु बीहू के नाम से जाना जाता है और यह मवेशियों को समर्पित होता है।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने बीहू के मौके पर अपने मवेशियों को नदियों और तालाबों में पारंपिक स्नान कराया और उनके शरीर पर ‘दिग्हल्ती पात’ (औषधीय गुणों वाले पौधे की पत्तियां) का लेप किया।
लोगों ने पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करते हुए पारंपरिक भजन भी गाए।
नए असमिया कैलेंडर के बोहाग महीने के पहले दिन पड़ने वाले, दूसरे दिन को मन्हू बीहू के नाम से जाना जाता है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और नाचते गाते हैं।
साथ ही इस दिन युवा अपने बड़ों का आर्शीवाद भी लेते हैं।
इस दिन सम्मान के तौर पर ‘बीहूवान’ (पारंपरिक असमिया टॉवर गमोचा) का आदान-प्रदान किया जाता है।
असम के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने शुक्रवार को बीहू के मौके पर बधाई दी।
उन्होंने कहा, “कामना करता हूं कि असमिया नववर्ष के आगमन का प्रतीक यह बीहू राज्य में सद्भावपूर्ण संबंध और शांति व संपन्नता के साथ भी विकास लाए।”
असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने भी राज्य के लोगों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि यह त्योहार स्थायी शांति और सम्पन्नता लेकर आए और आपसी रिश्तों को मजबूत करे।
सोनोवाल ने अपने शुभकामना संदेश में उम्मीद जताई कि असम की सांस्कृतिक पहचान का यह प्रतीक सभी धर्मो, जातियों, पंथ और संप्रदाय के लोगों के बीच दोस्ती और सद्भावना कायम करे।
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