‘मानव कवच का इस्तेमाल गलत, पर कश्मीर के हालात भी देखें’

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर में पत्थरबाजों से बचने के लिए सेना द्वारा एक युवक को मानव कवच के रूप में इस्तेमाल करने को पूर्व सेना प्रमुख वी.पी.मलिक ने सेना की मानवाधिकार संहिता का उल्लंघन बताया है, लेकिन साथ में जोड़ा है कि कश्मीर घाटी की ‘असाधारण स्थितियों’ को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

एक अन्य पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने कहा कि यह घटना नियमों का उल्लंघन है लेकिन इसे ‘एक बार की भूल’ माना जाना चाहिए।

13 अप्रैल को सेना की एक जीप के आगे एक कश्मीरी युवक को बांधा गया था। इस बारे में पूर्व सेना प्रमुख मलिक ने कहा, “हमें आज घाटी में मौजूद असाधारण स्थितियों को पहले समझना होगा..जिस तरह के आंदोलन हैं, पत्थरबाजी है, सैनिकों के साथ अभद्रता की स्थिति है, उस संबंध में असाधारण स्थितियों को देखना होगा।”

मलिक ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह सेना की मानवाधिकार संबंधी संहिता का उल्लंघन है, लेकिन फिर हम जब उसके (इसे अंजाम देने वाले सैन्य अफसर) खराब कृत्य को देखते हैं तो फिर हमें उन हालात के बारे में सोचना चाहिए जिसमें वह है।”

उन्होंने कहा कि यह सीधे सीधे सही या गलत का मामला नहीं है। अगर वह वहां कमांडर होते तो इन सब बातों पर गौर करते।

जनरल (सेवानिवृत्त) बिक्रम सिंह ने कहा, “यह एक बार की भूल है। मुझे पूरा विश्वास है कि सेना जरूरी सुधारात्मक कदम उठाएगी। भारतीय सेना बहुत बड़ी संस्था है जिसने हमेशा कानून के राज को माना है। सेना नियमों को मानने के लिए जानी जाती है।”

उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि सैन्य अफसर ने किस मजबूरी में यह रणनीति अपनाई। जांच चल रही है, तथ्य सामने आ जाएंगे।

सिह ने कहा कि इस तरह की ‘अपुष्ट सूचनाएं’ भी हैं कि अधिकारी इस रणनीति के जरिए इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन और मतदान कर्मियों को निकाल ले जाने में सफल रहा था।

13 अप्रैल को श्रीनगर-बडगाम के 38 बूथ पर पुनर्मतदान हुआ था।

सिंह ने कहा, “मुझे बताया गया है कि साढ़े तीन सौ स्थानीय पत्थरबाजों ने मतदान कर्मियों और इंडो तिब्बत सीमा पुलिस के दल को घेर लिया था। कल्पना कीजिए, तब क्या होता जब आत्मरक्षा में सुरक्षा बलों ने गोली चला दी होती? बड़ी संख्या में नागरिक मारे जाते। इसलिए, हमें जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए।”

भारतीय सेना मामले की जांच कर रही है। जम्मू एवं कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा बलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी के बारे में जनरल सिंह ने कहा कि कानून अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि देश का कानून सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि साथ में ही हमें कश्मीर में पाकिस्तान की चालों के प्रति सचेत रहना होगा। हमें मानवाधिकारों की रक्षा करनी होगी लेकिन यह भी देखना होगा कि सैनिकों का मनोबल न गिरे।

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