बाबरी मामले में आडवाणी, जोशी, उमा भारती पर चलेगा मुकदमा (राउंडअप)

नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह और केंद्रीय मंत्री उमा भारती सहित अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाया जाएगा। न्यायालय के इस फैसले से कल्याण सिंह तथा उमा भारती पर पद से इस्तीफे की तलवार लटक गई है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भाजपा तथा सरकार किसी भी नेता के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगी। उन्होंने कहा, “यह मामला सन् 1993 से ही चल रहा है। आज नए हालात पैदा नहीं हुए हैं।”

आडवाणी तथा जोशी राष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं, क्योंकि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी जुलाई में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उमा भारती केंद्रीय मंत्री हैं और कल्याण सिंह राजस्थान के राज्यपाल हैं।

फैसले के कुछ घंटों बाद जोशी तथा आडवाणी ने एक संक्षिप्त बैठक की।

आडवाणी, जोशी, उमा भारती, विनय कटियार (भाजपा), साध्वी ऋतंभरा, आचार्य गिरिराज किशोर, अशोक सिंघल और विष्णु हरि डालमिया (विहिप) पर छह दिसंबर, 1992 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद गिराए जाने से पहले रामकथा कुंज में एक मंच से भाषण देने को लेकर मुकदमा चल रहा है।

वह स्थान विवादित ढांचे से महज 200 मीटर की दूरी पर था।

गिरिराज किशोर और सिंघल का निधन हो चुका है।

न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष और न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन की सदस्यता वाली पीठ ने आपराधिक साजिश के मामले को बहाल करते हुए, मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया।

न्यायमूर्ति नरीमन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कल्याण सिंह पर राजस्थान के राज्यपाल होने के नाते अभी मुकदमा नहीं चलेगा, लेकिन इस पद से मुक्त होते ही उनके खिलाफ भी मुकदमा चलाया जाएगा।

शीर्ष न्यायालय ने आडवाणी और अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश के मामले को हटाने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मई 2010 के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह आदेश दिया।

कांग्रेस ने त्वरित सुनवाई की मांग की है, जबकि मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) तथा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने उमा भारती तथा कल्याण सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

कांग्रेस प्रवक्ता संजय झा ने आईएएनएस से कहा, “कानून अपना काम करेगा। हम उम्मीद करते हैं कि मामले की त्वरित सुनवाई होगी और दोषी दंडित होंगे और सजा भुगतेंगे।”

झा ने कहा, “यह सर्वविदित तथ्य है कि बाबरी विध्वंस एक सहज प्रतिक्रिया का परिणाम था, यह बात गलत साबित हो चुकी है और यह एक राजनीतिक साजिश थी।”

माकपा ने कहा कि उमा भारती तथा कल्याण सिंह को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। आईयूएमएल ने कहा कि कल्याण सिंह को तकनीकी पेच का सहारा नहीं लेना चाहिए और उमा भारती को भी इस्तीफा दे देना चाहिए।

वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा कि आडवाणी का भारत का राष्ट्रपति बनने का सपना मिट्टी में मिल गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मामले में मोड़ लाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “आडवाणी अब राष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर हो चुके हैं।” उन्होंने कहा कि बाबरी विध्वंस मामले में आडवाणी बलि का बकरा बन गए।

उमा भारती ने अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार करते हुए कहा कि साजिश रचने के आरोप अभी तक साबित नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि मस्जिद का ढांचा गिराने के पीछे कोई साजिश नहीं थी।

अदालत ने यह भी कहा कि लखनऊ की अदालत आडवाणी व अन्य के खिलाफ अतिरिक्त आरोप तय करेगी और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।

अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई नए सिरे से नहीं होगी और मामले की सुनवाई पूरी होने तक न्यायाधीश का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा।

शीर्ष न्यायालय ने मामले की सुनवाई दो साल के भीतर पूरी करने का आदेश देते हुए कहा कि मामले की सुनवाई दिन-प्रतिदिन के आधार पर होगी और सामान्य स्थिति में सुनवाई टाली नहीं जाएगी।

इससे पहले छह अप्रैल को पीठ ने भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ सदस्यों के खिलाफ आपराधिक साजिश के मामले को बहाल करने की सीबीआई और अन्य याचिकाकर्ताओं की मांग पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

शीर्ष न्यायालय ने छह अप्रैल को आदेश सुरक्षित रखने से पहले कहा था कि जहां तक आपराधिक साजिश के मामले का सवाल है, अदालत संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण शक्तियों का प्रयोग कर सकती है और मामले को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित कर सकती है, ताकि आडवाणी और जोशी समेत 13 अन्य लोगों पर आपराधिक साजिश का मामला चलाया जा सके।

हालांकि आडवाणी और जोशी दोनों ने इसका विरोध करते हुए दलील दी थी कि अदालत संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण शक्तियों का प्रयोग करके अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकती।

जिस पर पीठ ने कहा था, “अनुच्छेद 21 के कई पहलू हैं। फिर पीड़ितों के अधिकार के मामले में अनुच्छेद 21 का क्या होगा।”

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493