हिंदू महिला को तीन तलाक से अलग रखने की आग्रह वाली याचिका खारिज

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका खारिज कर दी जिसमें सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी कि मुस्लिम पुरुषों से शादी करने वाली हिंदू महिलाओं पर तीन तलाक लागू नहीं होना चाहिए।

अदालत ने कहा, “धर्म कोई भी हो, महिलाओं के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।”

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने कहा कि तीन तलाक से संबंधित मामला सर्वोच्च न्यायालय की एक संवैधानिक पीठ के समक्ष लंबित है। इसलिए उच्च न्यायालय इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकता।

याचिकाकर्ता ने पीठ को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय में जो मामला लंबित है, वह मुस्लिम महिलाओं से संबंधित है, मुस्लित पुरुषों से शादी करने वाली हिंदू महिलाओं से नहीं।

लेकिन, न्यायालय की पीठ ने याचिका पर यह कहकर सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि धर्म के भेदभाव के बिना महिलाओं के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।

इसके बाद अधिवक्ता विजय कुमार शुक्ला ने जनहित याचिका (पीआईएल) वापस ले ली और कहा कि वह इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में गुहार लगाएंगे।

पीआईएल में विशेष विवाह अधिनियम के तहत अंतरजातीय विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का निर्देश देने की मांग भी की गई थी।

याचिकाकर्ता ने कहा कि निकाहनामा उर्दू में लिखा होता है, इसलिए हिंदू महिलाएं तीन तलाक या बहुविवाह से संबंधित प्रावधानों को समझ नहीं पाती।

याचिका में साथ ही मांग की गई थी कि मौलवियों को हिंदू महिलाओं को तीन तलाक और बहुविवाह से संबंधित निकाहनामा के प्रावधानों के बारे में उनकी मातृ भाषा में समझाना चाहिए।

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