नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को केरल सरकार को टी.पी.सेनकुमार को राज्य के पुलिस महानिदेशक के पद पर फिर से बहाल करने के निर्देश दिए।
इसे केरल सरकार के लिए झटके के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने 25 मई, 2016 को पदभार ग्रहण करने के बाद सेनकुमार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पद से हटा दिया था। वह 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
केरल सरकार ने सेनकुमार को पद से हटाने को यह कहते हुए वाजिब ठहराया था कि उन्होंने पुत्तिंगल मंदिर में पटाखा विस्फोट और जीशा हत्याकांड मामले में ‘ठीक ढंग से जिम्मेदारियों का निर्वाह नहीं किया।’
राज्य सरकार के इस फैसले को सेनकुमार ने केरल उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। हालांकि उच्च न्यायालय से उन्हें निराशा हाथ लगी और फैसला उनके पक्ष में नहीं आया। इसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया, जिसने सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया।
इस वक्त सरकारी प्रबंधन संस्थान में निदेशक सेनकुमार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर खुशी जताते हुए तिरुवनंतपुरम में कहा कि न्याय हुआ है और यह उन लोगों का मनोबल बढ़ाने वाला है, जो अपने काम को लेकर प्रतिबद्ध होते हैं।
सेनकुमार ने कहा, “मैं इस जीत के लिए अपने वकीलों, मीडिया और उन सभी लोगों का आभार व्यक्त करता हूं, जो न्याय की मेरी इस लड़ाई में मेरे साथ रहे।”
उन्होंने कहा कि वह सरकार के अगले कदम की प्रतीक्षा करेंगे।
वहीं, मुख्यमंत्री विजयन ने संवाददाताओं से कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आ गया है। अब ‘हमें पूरे आदेश का इंतजार है। सर्वोच्च न्यायालय का पूरा आदेश मिल जाने के बाद हम इस दिशा में कानूनन आवश्यक कदम उठाएंगे।’
विजयन ने कभी विधानसभा में सेनकुमार पर बरसते हुए कहा था कि वह राज्य के पुलिस बल का नेतृत्व करने के लायक नहीं हैं।
इस बीच, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस.अच्युतानंदन ने कहा कि राज्य सरकार को न्यायालय के फैसले का पालन करना चाहिए।
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी, जिनके कार्यकाल में सेनकुमार डीजीपी के पद पर सेवारत रहे, ने कहा कि न्यायालय का यह फैसला अधिकारी के लिए मनोबल बढ़ाने वाला है और इस फैसले ने साबित कर दिया है कि उन्होंने सर्वश्रेष्ठ तरीके से मामलों की जांच की।
वहीं, सेनकुमार की जगह राज्य के पुलिस प्रमुख के रूप में पदभार संभालने वाले लोकनाथ बेहरा ने कहा कि उन्हें इस फैसले पर कुछ नहीं कहना। उन्होंने केवल इतना कहा कि ‘हम सब सरकारी कर्मचारी हैं।’
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