नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी के प्रसार में संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि लोगों की मानसिकता इसमें रुकावटें डाल रही है।
याचिका दायर करने और प्रबंधन के लिए डिजिटल रूप से सुरक्षित और पारदर्शी प्रणाली के उद्घाटन के मौके पर मोदी ने कहा, “समस्या बजट से ज्यादा लोगों की मानसिकता की है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्मार्टफोन्स लेकर चलने वाले लोग अब भी संपर्क विवरणों के लिए डायरियां साथ लेकर चलते हैं।
मोदी ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने कई हॉलीवुड फिल्मों की कीमत से भी कम कीमत में अपने पहले ही प्रयास में मंगलयान को मंगल पर पहुंचाने में कामयाबी हासिल की।
मोदी ने कहा, “हम अपने दैनिक जीवन में ्रप्रौद्योगिकी के इस्तेमाल में काफी पीछे हैं।”
मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी ने जनजातीय लोगों के भूमि अधिकारों को सुरक्षित रखने में भी सरकार की मदद की है।
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी से हम 30 वर्षो में ही वह पा सकते हैं, जिसे पाने में लोगों को हजारों वर्ष लग गए।
मोदी ने डिजिटीकरण के लाभ के बारे में कहा कि इससे संसाधनों की बचत और पर्यावरण की रक्षा करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि जब हम एक ए4 साइज के पेपर का इस्तेमाल करते हैं, तो हम यह नहीं सोचते कि ऐसे एक कागज को बनाने के लिए 10 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है। इसलिए ई-कामकाज करने से पानी, वनों, ऊर्जा और अन्य संसाधनों को बचाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इन संसाधनों को गरीबों के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
उन्होंने वकीलों से देश के गरीब और जरूरतमंद लोगों को कानूनी मदद प्रदान करने के लिए आगे आने का आग्रह भी किया।
प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में आईसीएमआईएस लॉन्च करते हुए कहा, “न्यायपालिका को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए फोरेंसिक साइंस और प्रौद्योगिकी बेहद जरूरी हैं..दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है और हमें साथ चलना होगा, ताकि हम पीछे न रहें।”
इस मौके पर न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर ने कहा कि इंटीग्रेटेड केस मैनेजमेंट प्रणाली (आईसीएमएस) पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित है और इसमें सभी हितधारक एक दूसरे के बारे में और अपने मामले के हर पहलू के बारे में जान पाएंगे।
केहर ने कहा कि वह इस प्रणाली को सभी उच्च न्यायालयों और निचली अदालतों में भी लागू करने की सिफारिश करते हैं।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि पेपरलेस अदालत पर्यावरण अनुकूल पहल है, जो साथ ही वादी को भी शक्तिशाली बनाती है।
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