अभियोजन पक्ष के अनुसार, कोखराज इलाके में रहनेवाले अहमद ने पहली जुलाई, 1995 को पड़ोसी महिला के घर पहुंचकर उसके पति की हालत गंभीर होने की जानकारी देकर गांव के बाहर तालाब पर ले गया और वहां उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। इस मामले में पीड़ित महिला ने थाने पहुंचकर घटना की नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
मुकदमे की विवेचना के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम दिनेश पाल यादव की अदालत में चली। शासकीय अधिवक्ता त्रिलोकी चंद्र केसरवानी ने पीड़िता समेत चार गवाहों को परीक्षित कराया।
दोनों पक्षों की दलीलों एवं पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद एडीजे प्रथम की अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए सात साल की कैद व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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