ईशा (रात) की नमाज के बाद मुख्य मजार पर दुआ मांगी गई। इसके बाद बारातों के आने का सिलसिला शुरू हुआ, जो पूरी रात जारी रहा। जायरीन ने दरगाह शरीफ पर निशान व चादर चढ़ाकर मन्नत मांगी। चार सौ से अधिक बारातों ने देर रात से सोमवार सुबह तक मजार शरीफ पर हाजिरी लगाई। ढोल मंजीरे की धुन पर नाचते-गाते बाराती गाजी की शान में कसीदे पढ़ रहे थे। इस दौरान हुई आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र रही।
दरगाह शरीफ स्थित मुख्य मजार पर खुद्दामों ने देर शाम गुलाबजल, चंदन, केवड़े के साथ 101 घड़ों से मजार को स्नान कराया। मजार शरीफ को फूलों से दूल्हे की तरह सजाया गया। सेहरा भी रखा गया। दरगाह प्रबंध समिति व प्रशासनिक अमले ने मजार शरीफ पर खिदमत में चादर पेश की। देर रात मजार शरीफ का मुख्य नाल दरवाजा बारातों के आगमन के लिए खोल दिया गया। बाराती जंजीरी गेट चूमते हुए दरगाह शरीफ में दाखिल हुए। नाचते-गाते बाराती आस्था और श्रद्धा से लबरेज दिख रहे थे। हजारों की संख्या में निशान भी चढ़ाए गए।
दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया, “बारातों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। नेपाल, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तरांचल, बंगाल, अहमदाबाद व उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से 400 से अधिक बारातें आई हैं। जौनपुर से घोड़े पर बारात आई। जबकि मुंबई से किन्नरों की तीन बारातें आईं। बारातों के आने का सिलसिला सुबह तक जारी रहा। जायरीनों ने अपनी बारात के साथ लाए गए दहेज का सामान, पलंगपीढ़ी, फल-फूल, मेवा, गहनें व कपड़े चढ़ाया। बारात की अगुवाई के लिए नाल दरवाजे पर दरगाह प्रबंध समिति के पदाधिकारी व सदस्यों, प्रशासनिक अधिकारियों व नगर के संभ्रांत लोग पूरी रात मौजूद रहे।”
दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद ने बताया कि देर शाम शुरू हुआ बारातों के आने का सिलसिला सोमवार सुबह नौ बजे तक जारी रहा।
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