माइक्रोफाइनेंस उद्योग 24 फीसदी बढ़ा

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही में माइक्रोफाइनेंस उद्योग की वृद्धि दर 26 फीसदी रही और कुल 1,06,916 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया।

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही में माइक्रोफाइनेंस उद्योग की वृद्धि दर 26 फीसदी रही और कुल 1,06,916 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया।

यह जानकारी आरबीआई द्वारा नियुक्त पहले स्व-नियामक संगठन (एसआरओ) और उद्योग संगठन माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक इस साल पूरे माइक्रोफाइनेंस उद्योग का कुल लोन पोर्टफोलियो 1,06,916 करोड़ रुपये रहा जिसमें एनबीएफसी(गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी)-एमएफआई(सूक्ष्म वित्तीय संस्थान) और बैंकों, लघु वित्त बैंकों, एनबीएफसी और बगैर मुनाफे के चलने वाले एमएफआई समेत अन्य प्रमुख ऋणदाताओं का ऋण पोर्टफोलियो शामिल है। वित्त वर्ष 2016-17 तक माइक्रोफाइनेंस ऋण में एनबीएफसी-एमएफआई की 42 फीसदी हिस्सेदारी रही जबकि बैंकों की हिस्सेदारी 38 फीसदी और एसएफबी (लघु वित्तीय बैंक) की हिस्सेदारी 14 फीसदी है।

एनबीएफसी-एमएफआई का कुल लोन पोर्टफोलियो वित्त वर्ष 2015-16 के 37,469 करोड़ रुपये के मुकाबले 25 फीसदी की साल-दर-साल वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 2016-17 में 46,847 करोड़ रुपये हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक कुल 2.83 करोड़ के ऋणों का वितरण किया गया जिसमें वित्त वर्ष 2015-16 के मुकाबले 13 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

एमएफआईएन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रत्ना विश्वनाथन ने बताया, “वृद्धि में गिरावट का रुझान समीक्षाधीन वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में जारी रहा, जो मुख्य रूप से नोटबंदी के कारण प्रभावित हुआ। यह गिरावट पूरी तरह नोटबंदी की वजह से न होकर अन्य बाहरी कारकों और कुछ इलाकों में निहित स्वार्थों की वजह से प्रदर्शन पर पड़ने वाले असर से भी प्रभावित रही जिससे कुल वृद्धि में गिरावट आई है। साल-दर-साल 89 फीसदी वृद्धि के मुकाबले साल की आखिरी तिमाही में वृद्धि दर 25 फीसदी रही। ऋणों के वितरण की दर साल-दर-साल आधार पर 25 फीसदी कम हुई है। हालांकि नकदी की पहुंच का विस्तार हो रहा है और कुछ संकटग्रस्त इलाकों में भी सुधार होना शुरू हो गया है, ऐसे में हम अगली तिमाहियों में वृद्धि के बेहतर आंकड़ों की उम्मीद कर सकते हैं।”

समीक्षाधीन तिमाही के दौरान आधे से अधिक (56 फीसदी हिस्सा) ऋण का वितरण कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, ओडिषा और पश्चिम बंगाल जैसे पांच राज्यों में हुआ है। एमएफआई के लिए फंड की औसत लागत 14.4 फीसदी रही है। जीएलपी (सकल ऋण पोर्टफोलियो) के वितरण में अधिकतम हिस्सेदारी 31 फीसदी के साथ दक्षिण भारत शीर्ष पर रही, इसके बाद 27 फीसदी के साथ उत्तर भारत, 24 फीसदी के साथ पश्चिम भारत और 18 फीसदी के साथ पूर्व भारत का नंबर आता है। पिछले वर्ष के दौरान ग्राहकों के आधार में 29 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई और एनबीएफसी-एमएफआई करीब 2.75 करोड़ ग्राहकों को माइक्रो-क्रेडिट मुहैया करा रहे हैं।

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