‘प्रभुनाथ को फांसी मिलनी चाहिए थी’

पटना, 23 मई (आईएएनएस)। पूर्व विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में हजारीबाग की अदालत द्वारा मंगलवार को पूर्व सांसद और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता प्रभुनाथ सिंह को भले ही उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, लेकिन दिवंगत विधायक की पत्नी चांदनी सिंह इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रभुनाथ को फांसी मिलनी चाहिए।

झारखंड के हजारीबाग की अदालत द्वारा प्रभुनाथ सिंह सहित तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद चांदनी सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “मैं अदालत के इस फैसले से संतुष्ट नहीं हूं। हत्यारों ने जिस तरह मेरे पति की हत्या सोची-समझी साजिश के तहत की थी, उन्हें कम से कम फांसी की सजा होनी चाहिए थी।”

उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि इस फैसले से मशरक की कई विधवाओं को संतोष मिला होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभुनाथ सिंह ने क्षेत्र की कई औरतों की मांगें सूनी कर दी है।

पटना के राजीवनगर में अपने घर में टेलीविजन पर इस फैसले को सुनने के बाद उन्होंने कहा, “इस फैसले के लिए उन्होंने 22 वर्षो तक संघर्ष किया। मैं अभी भी थकी नहीं हूं। भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। करनी का फल देर-सबेर मिलना तय है।”

22 साल बाद फैसला आने के बारे में उन्होंने कहा, “इस मामले में सरकार से लेकर प्रशासन तक ने मेरा साथ नहीं दिया। अगर दिया होता तो यह फैसला कब का आ चुका होता।”

दिवंगत अशोक सिंह के भाई तारकेश्वर सिंह ने फोन पर आईएएनएस से कहा, “न्याय के मंदिर को प्रणाम करता हूं। अगर इस फैसले के खिलाफ पूर्व सांसद उच्च न्यायालय जाते हैं, तो वहां भी मजबूती के साथ कानूनी लड़ाई लड़ूंगा।”

राजद नेता प्रभुनाथ सिंह के बारे में उन्होंने कहा कि वह जन्मजात अपराधी हैं, उनकी हत्यारे की प्रवृति रही है, जेल में भी वह शांत नहीं बैठेंगे।

उल्लेखनीय है कि तीन जुलाई, 1995 को मशरक विधानसभा क्षेत्र से जनता दल के विधायक अशोक सिंह की पटना स्थित उनके सरकारी आवास में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में प्रभुनाथ सिंह सहित अन्य पर आरोप लगा था। इस मामले में पटना सचिवालय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बाद में यह मामला, तब एकीकृत बिहार के हजारीबाग अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया था।

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