नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को यहां कहा कि गंगा की अविरलता सुनिश्चित किए बिना इसकी निर्मलता संभव नहीं है।
नीतीश यहां बिहार भवन में मीडिया को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “गंगा से मेरा भावनात्मक लगाव है। गंगा नदी के किनारे मेरा जन्म हुआ है। मेरी पढ़ाई-लिखाई भी गंगा नदी के किनारे ही हुई है।”
उन्होंने कहा, “इस संबंध में आज (शनिवार) हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर उन्हें एक पत्र सौंपा है। पत्र में गंगा नदी के गाद के कारण बिहार में आ रही समस्याओं के बारे में विस्तार से उल्लेख किया गया है।”
उन्होंने कहा, “गंगा का प्रवाह मार्ग गाद से पट गया है। फरक्का बराज के बनने के बाद इसके उध्र्व भाग में निरंतर गाद सालों-साल जमा होती रही है, जिसके कारण बाढ़ का पानी बक्सर, पटना तथा भागलपुर तक काफी देर तक रुका रहता है। यह बाढ़ बिहार में जलजमाव एवं तबाही मचाती है, जिससे राज्य को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष प्रत्येक साल काफी नुकसान होता है। गंगा नदी में बाढ़ की सारी समस्याओं का मूल कारण गाद ही है।”
नीतीश ने कहा, “इन समस्याओं के दीर्घकालीन समाधान के लिए एक प्रभावकारी राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाने की आवश्यकता है, जो न केवल गंगा बल्कि अन्य सभी नदियों के गाद प्रबंधन में सहायक हो एवं नदी की अविरलता तथा निर्मलता को भी बनाए रखे, साथ ही इनके पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रभावित न करे।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “फरक्का बराज की उपयोगिता का पुनर्मूल्यांकन करने का समय आ गया है। सभी पहलुओं को समेकित रूप से देखा जाए एवं समस्या का हल निकाला जाए। चिताले कमेटी ने भी धार के साथ गाद को बहने के लिए रास्ता देने की बात कही है। यही बात हम लगातार कहते आ रहे हैं।”
नीतीश ने कहा, “जलमार्ग के विकास के लिए एक समेकित दृष्टिकोण अपनाना होगा। इस साल फरवरी में पटना में एवं इसी महीने में दिल्ली में गंगा की अविरलता विषय पर बिहार सरकार द्वारा सम्मेलन आयोजित किया गया। पटना डिक्लेरेशन एवं दिल्ली डिक्लेरेशन गाद की समस्या को दूर करने में अत्यंत लाभदायक होगा।”
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि मानसून आगमन के पूर्व 10 जून तक एक विशेषज्ञ दल भेजकर राज्य सरकार के तकनीकी अधिकारियों के समन्वय के साथ गंगा नदी में गाद की समस्या का लीन सीजन में स्थलीय अवलोकन एवं आकलन करवा लिया जाए, ताकि मानसून अवधि में संभावित बाढ़ की विभीषिका का सही कारण एवं समाधान दृष्टिगत हो।”
नीतीश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनके इस अनुरोध को स्वीकार किया और कहा कि 10 जून से पहले एक विशेषज्ञ दल स्थल भ्रमण हेतु जाएगा। साथ ही संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों के अधिकारी उनसे शनिवार को ही मिलकर गंगा की अविरलता विषय पर दिशा-निर्देश प्राप्त करेंगे।
नीतीश ने कहा कि शनिवार को उन्होंने हैदराबाद हाउस में मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ से मुलाकात की, क्योंकि मॉरीशस से बिहारवासियों का गहरा लगाव है।
dharmpath.com dharmpath