नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शनिवार को पर्यावरण मंत्रालय द्वारा वध के लिए पशुओं की बिक्री पर रोक लगाए जाने को अपने सांप्रदायिक एजेंडे को अमली जामा पहनाने के लिए ‘कानूनी आड़’ करार दिया और इस संबंध में जारी की गई अधिसूचना को वापस लिए जाने की मांग की।
माकपा पोलितब्यूरो ने एक बयान जारी कर कहा, “पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वध के लिए पशु बिक्री पर रोक लगाने वाली अधिसूचना मोदी सरकार द्वारा देश की जनता पर आहार संहिता लागू करने के अपने सांप्रदायिक और बांटने वाले एजेंडा को कानूनी आड़ देने का बेहद घटिया प्रयास है।”
माकपा ने अपने बयान में कहा है कि इस फैसले से पशुपालन करने वाले करोड़ों किसानों की आजीविका प्रभावित होगी, पारंपरिक पशु मेले खत्म हो जाएंगे और किसानों पर अनुपयोगी हो चुके पशुओं का पालन करने का अतिरिक्त बोझ आ जाएगा।
वक्तव्य में कहा गया है, “पहले से ही खेती-बाड़ी में लागत बढ़ने से आत्महत्या करने को मजबूर किसानों पर इससे और बोझ बढ़ जाएगा। इस चमड़ा उद्योग और मांस निर्यात उद्योग भी प्रभावित होगा, जिस पर लाखों लोगों की आजीविका टिकी है।”
माकपा ने कहा, “यह अधिसूचना राज्यों के अधिकारों का भी उल्लंघन करने वाला है। माकपा इस अधिसूचना की निंदा और विरोध करती है और इसे वापस लिए जाने की मांग करती है।”
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