चेन्नई, 27 मई (आईएएनएस)। केरल के राज्यपाल एवं पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. सतशिवम ने यहां एक भव्य समारोह में शानदार प्रदर्शन करने वाले नौ सांसदों को संसद रत्न अवार्ड से सम्मानित किया।
चेन्नई के एक गैर सरकारी संगठन ‘प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन’ द्वारा स्थापित अवार्ड दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को प्रदान किया गया।
इस अवसर पर सतशिवम ने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र असहमतियों को भी जगह देता है, साथ ही उन्होंने सांसदों से देश में चल रहे निराशावादी माहौल में सुधार लाने के लिए समाज के बीच रचनात्मक बहस को प्रोत्साहित करने का अनुरोध भी किया।
सतशिवम ने कहा, “लोकतंत्र असहमतियों को जगह तो देता है, लेकिन हम ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं, जहां असहमति वाले विचार को अक्षम्य की तरह देखा जा रहा है, बल्कि आम लोगों के खिलाफ इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।”
सतशिवम ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाल ही में दिए बयान का जिक्र किया, जिसमें मुखर्जी ने ‘असहिष्णु भारतीय’ की बजाय ‘तर्कसंगत भारतीय’ की जरूरत पर बल दिया था।
उन्होंने कहा, “संसदीय प्रणाली की महत्ता से नावाकिफ लोग लंबी बहसों की आलोचना करने लगे हैं, क्योंकि उन्हें इसका अहसास ही नहीं है कि देश ने अपनी नीतियां लंबी-लंबी बहसों के बाद ही हासिल की हैं।”
संसद रत्न से सम्मानित होने वाले सांसदों में महाराष्ट्र के मावेल से शिवसेना के सांसद श्रीरंग अप्पा बार्ने, महाराष्ट्र के हिंगोली से कांग्रेस सांसद राजीव शंकरराव सतव और महाराष्ट्र के ही कोल्हापुर से कांग्रेस सांसद धनंजय भीमराव महाडिक शामिल हैं।
ओडिशा के कटक से बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद भर्तृहरी महताब और केरल के कोल्लम से रीवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद एन. के. प्रेमचंद्रन को बहस में उत्कृष्टता एवं अन्य संसदीय कार्यवाहियों में सराहनीय कार्य के लिए स्पेशल अवार्ड प्रदान किए गए।
महाराष्ट्र के नानदरबार से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद हीना विजयकुमार गावित को महिला श्रेणी के अंतर्गत सम्मानित किया गया।
महाराष्ट्र के शिवसेना सांसद संजय राउत, केरल के माकपा सांसद के. एन. बालगोपाल और केरल के माकपा की ही सांसद टी. एन. सीमा राज्यसभा से अवार्ड पाने वाले सांसदों में शामिल रहे।
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