कोच्चि, 30 मई (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने विजिंगम बंदरगाह परियोजना में गड़बड़ी दर्शाने वाली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रपट पर कड़ा रुख अख्तियार किया है, वहीं पूर्व रक्षामंत्री ए.के.एंटनी ने इसे गैर महत्वपूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया। विजिंगम बंदरगाह परियोजना समझौता साल 2015 में कांग्रेस की ओमन चांडी सरकार ने किया था।
एंटनी ने कहा, “कैग की रपट अंतिम नहीं है, क्योंकि रपट की जांच के लिए कई प्रक्रियाओं का पूरा होना बाकी है। यह आम बात है, इससे ज्यादा कुछ नहीं।”
पिछले सप्ताह विधानसभा में पेश की गई कैग की रपट के मुताबिक, चांडी की सरकार द्वारा किए गए समझौते में कई तरह की खामियां पाई गई हैं।
मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने पार्टी की एक बैठक में घोषणा की है कि कैग का निष्कर्ष ‘गंभीर प्रकृति’ का है और सरकार उच्च न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश से इस मामले की न्यायिक जांच कराने पर विचार कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजयन तब से चांडी से खार खाए हुए हैं, जब उन्होंने साल 2006 में मुख्यमंत्री रहने के दौरान एसएनसी लवलीन मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा था।
सीबीआई के आरोप पत्र में विजयन को सातवां आरोपी बनाया गया था।
उल्लेखनीय है कि ओमन चांडी की सरकार ने अडानी पोर्ट्स के साथ साल 2015 में 7,525 करोड़ रुपये की विजिंजम परियोजना के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था। पहले चरण का काम लगभग पूरा होने को है।
परियोजना के लिए केवल अडानी पोर्ट्स ने ही बोली लगाई थी और इसके लिए अनुदान के रूप में 1,635 करोड़ रुपये की मांग की थी।
समझौते के मुताबिक, अडानी 40 वर्षो तक बंदरगाह का संचालन करेगी, जिसे आगे 20 साल और बढ़ाया जा सकता है। वहीं राज्य सरकार को बंदरगाह संचालन शुरू होने के 15 वर्षो बाद इससे होने वाली आय का एक हिस्सा मिलेगा।
dharmpath.com dharmpath