नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने मांग की है कि केंद्र व राज्य सरकारों की सभी स्वास्थ्य समितियों में उसका कम से कम एक सदस्य होना चाहिए। आईएमए ने अपनी मांगों के समर्थन में मंगलवार को ‘दिल्ली चलो’ शांतिपूर्ण सत्याग्रह का आह्वान किया है।
आईएमए की तरफ से यहां जारी बयान के अनुसार, विरोध मार्च में हजारों चिकित्सक, छात्र एवं अन्य लोग राजघाट से इंदिरा गांधी स्टेडियम तक पहुंचेंगे, जहां ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होगी।
बयान के अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य समितियों में प्रतिनिधित्व एसोसिएशन की तमाम अन्य महत्वपूर्ण मांगों में से एक है, जिन्हें अभियान का हिस्सा बनाया गया है। जो लोग प्रत्यक्ष तौर पर ‘दिल्ली चलो’ मार्च में शामिल नहीं हो पाएंगे, वे वेबकास्ट के जरिए पल-पल की गतिविधियों से जुड़े रहेंगे।
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल तथा आईएमए के मानद महासचिव डॉ. आर. एन. टंडन ने एक संयुक्त वक्तव्य में कहा, “हमें सरकार की जरूरत क्यांे होती है? क्यों नहीं उच्चतम न्यायालय की निगरानी समितियों या 20 नामांकित सदस्यों से ही सरकार चला ली जाती? यदि नहीं, तो फिर लोकतांत्रित तरीके से चुने गए 168 सदस्यों वाली मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को खत्म कर क्यों 20 सदस्यों वाली एक अलोकतांत्रिक, तानाशाहीपूर्ण, बिना प्रतिनिधित्व वाली एक बॉडी को लाने की कोशिशें की जा रही है, जिसमें आठ सदस्य गैर-चिकित्सा पृष्ठभूमि के भी हैं और जो मिल कर चिकित्सा शिक्षा, नियम आदि के फैसले लेंगे। यदि आईएमए एक्ट में बदलाव की जरूरत है तो किया जाए। परंतु, यह आवश्यक है कि आईएमए का प्रतिनिधित्व ठीक प्रकार से हो।”
प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा, “पेशेवर मामलों में बिना चिकित्सा जगत को विश्वास में लिए निर्णय लिए जा रहे हैं। अब इस बात की जरूरत है कि आईएमए का प्रतिनिधि सरकार की प्रत्येक नीति निर्धारण समिति में हो।”
बयान के अनुसार, आईएमए एक हस्ताक्षर अभियान भी चला रहा है, जिसमें हजारों-लाखों की संख्या में डॉक्टरों के हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं। ये हस्ताक्षर मांगों के साथ सरकार को सौंपे जाएंगे।
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