पीड़ित बच्चे के पिता ने 14 मई, 2008 को उत्तरी फिरोजाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा कि उसके नौ वर्षीय बेटे के साथ बबलू ने दुष्कर्म किया और मारपीट की साथ ही धमकी दी कि अगर उसने घर पर किसी को बताया तो जान से मार देगा। बच्चे को काफी तकलीफ हुई। वह सारी रात सोया नहीं और रोता रहा। काफी समझाने पर उसने बबलू के द्वारा की गई घटना के बारे में बताया।
पुलिस ने अभियोग दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने अभियुक्त पर आरोप लगाया, जिसने आरोप से इनकार करते हुए मुकदमे की मांग की। न्यायालय में तमाम गवाहों ने गवाही दी। सहायक अभियोजन अधिकारी रवींद्र पचौरी एवं वादी के अधिवक्ता अब्दुल सलाम ने केस को साबित करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय की तमाम नजीरें पेश कीं।
न्यायाधीश अरविंद कुमार यादव ने तमाम साक्ष्य एवं गवाहों के बयानों का अध्ययन करने के बाद बबलू को धारा 377 एवं 506 आईपीसी का दोषी पाते हुए छह वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
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