दार्जिलिंग, 18 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में पुलिस की गोलीबारी में तीन कार्यकर्ताओं की मौत के विरोध में रविवार को कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ‘काला दिवस’ मना रहा है।
जीजेएम के हजारों कार्यकर्ताओं ने मारे गए कार्यकर्ताओं के शवों के साथ मार्च निकाला।
सुरक्षाबलों और आंदोलनकारियों के बीच ताजा झड़प की कोई सूचना नहीं है।
जीजेएम के युवा कार्यकर्ताओं ने हाथों में तिरंगा ले रखा था। वे चौक बाजार से मार्च पर निकले और गोरखालैंड के समर्थन में नारेबाजी की।
दार्जिलिंग में ‘पुलिस वापस जाओ’ और ‘गोरखालैंड-गोरखालैंड’ के नारे लग रहे हैं। गोरखा कार्यकर्ताओं का दावा है कि अब यह आंदोलन राजनीतिक न रहकर आम लोगों के आंदोलन में बल गया है।
एक युवा महिला प्रदर्शनकारियों ने टेलीविजन चैनल को बताया, “इस रैली में आज 15,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। ये सिर्फ जीजेएम के लोग नहीं है। दार्जिलिंग के लोग मिलकर अलग गोरखालैंड की मांग कर रहे हैं। देखते हैं, हम कितनी दूर जा सकते हैं।”
इस रैली से पहले रविवार सुबह मौन मार्च निकाला गया। दार्जिलिंग में लोगों ने शांति बहाली की मांग के लिए यह मार्च निकाला।
जीजेएम के नेता अमर सिंह राय ने दार्जिलिंग की स्थिति को ‘बहुत बहुत अस्थिर’ बताते हुए कहा कि अलग गोरखालैंड की मांग उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बंगाल सरकार के साथ किसी चर्चा की संभावना से इनकार किया है।
राय ने कहा, “स्थिति बहुत अस्थिर है। चर्चा का विकल्प खुला है लेकिन मैं जानता हूं कि हमारी पार्टी केवल तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के साथ चर्चा नहीं करेगी।”
उन्होंने कहा, “हम केंद्र सरकार के साथ चर्चा करेंगे, लेकिन एजेंडे में सिर्फ गोरखालैंड को अलग राज्य बनाए जाने की बात होगी।”
गोरखा कार्यकर्ताओं ने रविवार को सड़क मार्ग बाधित किया और क्षेत्र में जीजेएम द्वारा आहूत 12 घंटे की हड़ताल के समर्थन में कई स्थानों पर प्रदर्शन किए।
जीजेएम समर्थकों ने जयगांव में दलसिंगपारा टी एस्टेट के पास सड़क को बाधित किया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जीजेएम पर आतंकवादियों एवं पूर्वोत्तर के विद्रोही समूहों से जुड़े होने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि गोरखालैंड आंदोलन को दोबारा पुनर्जीवित करने के पीछे गहरी साजिश है।
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