नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) में रिक्त पदों को लेकर दायर एक याचिका पर गृह मंत्रालय से जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि एनडीएमए और एनआईडीएम में ये पद पिछले दो साल से रिक्त पड़े हुए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायाधीश सी. हरी शंकर की खंडपीठ ने सरकार से मामले पर अगली सुनवाई तक जवाब देने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
आपात स्थितियों में समय रहते एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए आपदा प्रबंधन को लेकर नीतियां और योजनाएं तैयार करने तथा दिशा-निर्देश बनाने की जिम्मेदारी एनडीएमए पर होती है।
वकील गौरव कुमार बंसल द्वारा दायर की गई याचिका में दावा किया गया है कि एनडीएमए के उपाध्यक्ष और सचिव के पद बीते दो वर्ष से रिक्त पड़े हुए हैं।
याचिका में कहा गया है कि एनआईडीएम में भी प्राध्यापकों और सहायक प्राध्यापकों सहित कई अहम भी रिक्त पड़े हुए हैं।
बंसल का कहना है कि इन पदों के रिक्त रहने से दोनों संस्थानों का दैनिक कार्य प्रभावित हो रहा है।
याचिका में कहा गया है, “किसी उपाध्यक्ष के न होने के चलते एनडीएमए के कर्मचारी बिना किसी दिशा-निर्देश के काम कर रहे हैं और दैनिक कार्यो के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय या गृह मंत्रालय से दिशा-निर्देश मांग रहे हैं, जिसके चलते संस्थान की प्रभावोत्पादका प्रभावित हो रही है।”
याचिका के अनुसार एडीएमए में जहां दो पद रिक्त हैं, वहीं एनआईडीएम में कुल 19 पद रिक्त पड़े हुए हैं।
dharmpath.com dharmpath