भोपाल, 5 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गैर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) और गैर कांग्रेस की बात करने वाले दल एक बार फिर करीब आने लगे हैं। इसी क्रम में आठ जुलाई को विभिन्न दलों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें प्रदेश की बदहाल होती स्थिति, बढ़ती शोषण की घटनाओं और जनसमस्याओं को लेकर साझा रणनीति बनाई जाएगी।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) के राज्य सचिव बादल सरोज ने बुधवार को एक विज्ञप्ति जारी कर बताया, “दर्जन भर से अधिक राजनीतिक दलों, अनेक सामाजिक संगठनो, अलग-अलग क्षेत्रों में संघर्षो की अगुआई कर रहे प्रमुख आंदोलनकारी व्यक्तियों की साझा बैठक आठ जुलाई को पार्टी के राज्य कार्यालय भोपाल में होने जा रही है।”
बताया गया है कि इस बैठक में चारों वामपंथी दलों के अलावा बहुजन समाज पार्टी(बसपा), गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, जनता दल यूनाइटेड(यूनाइटेड), जनता दल(सेक्युलर), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), राष्ट्रीय समानता दल, समाजवादी जन परिषद आदि राजनीतिक दल एवं जनांदोलनों के राष्ट्रीय मंच (एनएपीएम), नर्मदा बचाओ आंदोलन, किसान मजदूर संघर्ष समिति एवं अलग अलग स्थानों पर सक्रिय विस्थापन प्रभावित आंदोलनों की अगुआई कर रहे जनांदोलनों को आमंत्रित किया गया है ।
इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता आनंद मोहन माथुर, पूर्व सांसद कल्याण जैन सहित चार पूर्व विधायक डक कल्पना पारुलेकर, डॉ. सुनीलम, महेश दत्त मिश्र तथा ब्रिजेन्द्र तिवारी को भी न्योता भेजा गया है ।
दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के राज्य सचिवों बादल सरोज (माकपा) तथा अरविंद श्रीवास्तव (सीपीआई) ने कहा है कि दोनों कथित बड़े दलों की नीतियों के सवाल पर एकता के चलते प्रदेश में विपक्ष लगभग अनुपस्थित सा बताया जाने लगा है। इसके चलते जहां जनता के जीवन के लिए संकट बने मुद्दों की अनदेखी हो रही है, वहीं निरंकुशता बढ़ी है, लोकतंत्र खतरे में पड़ा है।
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