किसान मुक्ति यात्रा तीसरे दिन इंदौर से शुरू

इंदौर, 8 जुलाई (आईएएनएस)। किसान मुक्ति यात्रा तीसरे दिन शनिवार को इंदौर के सुखलिया से शुरू हुई। किसान नेताओं के साथ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर, योगेंद्र यादव और आनंद मोहन माथुर ने यहां के गीतापुर चौराहे पर बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और यात्रा को आगे बढ़ाया।

किसान नेताओं की टोली बाबा साहेब की जन्मस्थली महू गांव पहुंची। यहां बाबा साहेब मठ के सचिव ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह किसानों की हर मांग पूरी कर संविधान की गरिमा बढ़ाए।

ज्ञात हो कि बाबा साहेब के पिताजी सेना के सिपाही थे और उस समय महू छावनी में ही कार्यरत थे। उन्हीं दिनों भीम राव (बाबा साहेब) का जन्म हुआ था।

यात्रा के दौरान पहली जनसभा धामनौद में की गई। धामनौद के किसान कर्ज और फसलों के कम दाम मिलने के अलावा भूमि अधिग्रहण की समस्या से भी परेशान हैं।

एक स्थानीय किसान ने कहा, “मैं पढ़ा-लिखा हूं, लेकिन सरकार मुझे नौकरी नहीं दे रही है और मैं कुछ भी कर नहीं पा रहा हूं, क्योंकि सरकार ने मेरी जमीन का जबरन अधिग्रहण कर लिया और मुआवजा तक नहीं दिया।”

एक स्थानीय किसान नेता रामस्वरूप पाटीदार ने कहा कि दिल्ली में लोग आत्महत्या करते हैं, तो खबर बन जाती है। क्या गांव के किसान की जान की कोई कीमत नहीं है?

उन्होंने कहा, “अब हम अपनी आवाज दिल्ली तक पहुंचाएंगे और जैसे मध्यप्रदेश सरकार की कुर्सी हमने हिला दी, वैसे ही दिल्ली सरकार की कुर्सी भी हिलाकर ही मानेंगे।”

जनसभा में योगेंद्र यादव ने कहा, “किसानों की दो ही मांगें हैं- कर्ज से मुक्ति और फसल के पूरे दाम। सरकार हमारी कर्जदार है, इसलिए अपना हक मांगना हमारा फर्ज है।”

उन्होंने सभी किसान साथियों का दिल्ली आने के लिए आह्वान करते हुए कहा, “धामनौद के साथियों, आप सभी 18 जुलाई को दिल्ली जरूर आइए और किसानों की लड़ाई को सफल बनाइए।”

धामनौद के बाद दूसरी जनसभा खलघाट में हुई। सभा में राजू शेट्टी ने कहा, “हमारा संघर्ष किसानों के जीवन और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए है और इस लड़ाई के लिए 6 नहीं, 6000 किसान भी अपना जीवन देने के लिए तैयार हैं। हमें किसी भी हाल में यह जंग जीतनी है।”

वहीं, वी.एम. सिंह ने कहा, “सरकार की गलत नीतियों के कारण ही किसान परेशान हैं और आत्महत्या करने को मजबूर हैं। हम सब ऐसी सरकार को उखाड़ फेकेंगे और देश में अगली सरकार किसानों की सरकार होगी।”

तीसरे दिन की तीसरी जनसभा नर्मदा घाटी के किनारे छोटा बड़दा गांव में हुई। यहां की जनसभा में डॉ. सुनीलम ने कहा, “हमारी इस यात्रा के प्रेरणादायक गांव के किसान हैं और हमें इस किसान मुक्ति यात्रा के लिए नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं से ऊर्जा मिलती है।”

विदित हो कि सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाए जाने की वजह से आसपास के रिहायशी इलाकों के लोगों को विस्थापन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार ने छोटा बड़दा, बड़ा बड़दा आदि गांवों के किसानों को 31 जुलाई तक गांव खाली करने का नोटिस दे दिया है, लेकिन पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की है। इन गांवों के लोग विस्थापन के खिलाफ मेधा पाटेकर के नेतृत्व में अलग आंदोलन भी कर रहे हैं।

किसान मुक्ति यात्रा में हर एक दिन एक किसान नेता को समर्पित किया जा रहा है। शुक्रवार का दिन गांधी जी को समर्पित था, शनिवार का दिन महान किसान नेता बी.डी. शर्मा को समर्पित रहा।

किसान मुक्ति यात्रा में प्रमुख किसान नेताओं के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता वी.एम. सिंह, राजू शेट्टी, हन्नान मौला, अविक साहा, डॉ. सुनीलम्, दर्शन पाल, सुंदर विमलनाथन, के.चंद्रशेखर, कविता कुरुग्न्थी और योगेंद्र यादव शामिल रहे। यह किसान मुक्ति यात्रा 6 राज्यों से होती हुई 18 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेगी।

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