जेपी हॉस्पिटल में यमन के युवक को मिली नई जिंदगी (फोटो सहित)

नई दिल्ली, 9 जुलाई (आईएएनएस)। जेपी हॉस्पिटल के ओथोर्पेडिक्स विभाग एवं न्यूरो सर्जरी विभाग की टीम ने एक बेहद जटिल सर्जरी कर 14 वर्षीय युवक को नई जिंदगी प्रदान की है। युवक फिरोज (बदला हुआ नाम) यमन के वार जोन का निवासी है जिसका एक पैर पूरी तरह पलट गया था। पैर के पूरी तरह पलट जाने के कारण युवक को दिव्यांग की तरह जीवन व्यतीत करना पड़ता था।

अस्पताल ने एक बयान में कहा कि बीमारी की वजह से रोगी को दैनिक जीवन में बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। जेपी हॉस्पिटल के दो विभागों के चिकित्सकों की अनुभवी टीम ने अपने संयुक्त प्रयास से मरीज के पैर को न सिर्फ पूरी तरह सामान्य कर दिया बल्कि पैर के टेढ़े होने के कारण का भी सफलतापूर्वक इलाज किया।

यह कामयाबी जेपी हॉस्पिटल के ओथोर्पेडिक्स विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गौरव राठौर, न्यूरो सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिनेश रत्तनानी एवं डॉ. रोहन सिन्हा तथा डॉक्टरों की टीम को मिली।

जेपी हॉस्पिटल के ओथोर्पेडिक्स विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गौरव राठौर ने बताया, “इस बीमारी को न्यूरोगेनिक इक्यूनो कावोवारस फूट लेफ्ट साइड कहते हैं। इस बीमारी को ठीक करने के लिए युवक के माता-पिता ने जेपी हॉस्पिटल से पहले यमन में दो बार कमर की सर्जरी कराई थी लेकिन बीमारी जस की तस बनी रही। इसके बाद उसे जेपी हॉस्पिटल लाया गया। यहां प्राथमिक जांच में पता चला कि मरीज का पैर उसकी रीढ़ की हड्डी की एक बीमारी के कारण मुड़ गया था। हड्डी संबंधी बीमारी को ठीक करने के लिए ट्रीपल आर्थोडिजीज वीथ टेनडान ट्रांसफर प्रोसीजर किया गया। इस सर्जरी के तहत पांच अलग-अलग ऑपरेशन करना पड़ा और पैर की हड्डी के तीन जोड़ों को काटकर सीधा किया गया।”

युवक की बीमारी ठीक करने वाले न्यूरो विभाग की टीम के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. दिनेश रत्तनानी ने उसके कमर से संबंधित बीमारी की जानकारी दी, “बच्चे के पैर का मुड़ने का कारण उसकी कमर से जुड़ी एक गंभीर बीमारी थी। इस बीमारी को टेथर्ड स्पाइनल कोर्ड वीथ एल4 एल5 ड्रामोयड वीथ फिलम ट्रमाइनल कहते हैं। इस बीमारी के तहत शरीर की नसें एक-दूसरे से बुरी तरह उलझ या चिपक जाती हैं। नसों के चिपकने के कारण कई तरह की बीमारियां होने लगती हैं। मरीज के मेरूदंड में कई नसें एक दूसरे से चिपकी हुई थीं। इसके साथ ही मेरूदंड में रसौली (ड्रमायड ट्यूमर) भी थी। बीमारी के कारण न सिर्फ बच्चे का पैर असामान्य होकर पूरी तरह पलट गया था बल्कि वो अपनी सामान्य दिनचर्या जैसे पेशाब और शौच आदि भी सही से नहीं कर पाता था।”

न्यूरो विभाग की टीम के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रोहन सिन्हा ने कहा, “हमारे सामने दो मुख्य चुनौतियां थीं। पहले तो उसके मेरूदंड में उलझी हुई नसों को सही करना ताकि पैर दोबारा टेढ़ा न हो और दूसरा टेढ़े पैर को सीधा करना। पूरे प्रोसीजर में करीब 7-8 घंटे का समय लगा।”

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