धरना प्रदर्शन के दौरान पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में चंपारण आंदोलन का यह शताब्दी वर्ष है। हरित क्रांति की जनक दिवंगत इंदिरा गांधी का भी यह शताब्दी वर्ष है। इंदिरा गांधी की उसी हरित क्रांति के कारण आज 125 करोड़ से अधिक आबादी वाला भारत देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो पाया है।
बघेल ने कहा, “यूपीए सरकार के समय लोगों को 35 किलो चावल मिलता था। आज नरेंद्र मोदी के राज में उसी गरीब जनता को सात किलो चावल ही मिल पा रहा है। यूपीए के समय किसानों को मुफ्त बिजली प्राप्त होती थी, वहीं भाजपा सरकार का बिजली बिल काफी ज्यादा होता है। किसानों को सरकार की इन्हीं सब किसान विरोधी नीतियों के कारण आत्महत्या करना पड़ रहा है।”
बघेल ने कहा, “राज्य सरकार के किसान विरोधी रवैये के चलते प्रदेश में कर्ज से दबे और आर्थिक तंगी से ग्रस्त किसानों की लगातार हो रही आत्महत्या की घटनाएं बढ़ने के बावजूद असंवेदनशील रमन सरकार द्वारा पीड़ित किसान परिवार के आंसू पोछने एवं उन्हें तत्काल राहत पहुंचाने के लिए फुर्सत नहीं है। किसानों के हित से जुड़े 15 सूत्री मांगों के साथ किसान सत्याग्रह आंदोलन पूरे प्रदेश के जिला मुख्यालय में चलाया जा रहा है।”
अभनपुर विधायक धनेंद्र साहू ने कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में किसानों की दुर्दशा है। जिस छत्तीसगढ़ में कभी किसानों ने आत्महत्या नहीं की, आज उन्हें सरकार से किसी भी प्रकार से सहयोग न मिलने के कारण आत्महत्या करने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
बघेल की घोषणा के अनुरूप महासमुंद में बागबाहरा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम मोखा के दिवंगत मंथीर ध्रुव की पत्नी समारी बाई व पुत्र मोहन ध्रुव को और जामगांव के दिवंगत हिराधर निषाद के पुत्र भुनेश्वर निषाद को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई।
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