नई दिल्ली, 13 जुलाई (आईएएनएस)। कंज्यूमर वॉयस ने 17 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के आगामी मॉनसून सत्र में मोटर वाहन संशोधन विधेयक 2017 के पारित होने के समर्थन के लिए राज्य सभा के सांसदों को अनुरोध पत्र लिखा है, जो कि रोजाना 400 लोगों को सुरक्षित करने में सहायक साबित होगा।
कंज्यूमर वॉयस ने एक बयान में कहा कि अगर राज्यसभा से बिल को मंजूरी मिल जाती है, तो यह एक नए सख्त कानून को सुनिश्चित करने में सहायक होगा। लिहाजा, सड़क दुर्घटनाओं में आए दिन खत्म हो रहे मूल्यवान मानव जीवन को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
कंज्यूमर वॉयस के मुख्य संचालन अधिकारी आशिम सानयाल ने कहा “अगर यह विधेयक और अधिक लंबे समय के लिए स्थगित हो गया, तो संसद के अगले सत्र से पहले लगभग 36,000 नागरिकों का जीवन को खतरे की जद में होगा। इन हताहतों की संख्या में हजारों निर्दोष बच्चे भी शामिल हो सकते हैं। लिहाजा, ये जरूरी है कि इस सत्र में विधेयक का मार्ग साफ होना चाहिए, ताकि यह आसानी से पारित हो सके।”
मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2017 के तहत संशोधित प्रावधान और जुर्माना के माध्यम से सड़कों पर मौत की दुर्घटनाओं को कम करने की कोशिश की जा रही है। सुरक्षा बेल्ट या ‘बाल संयम प्रणाली’ को कार में 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए अनिवार्य किया गया है, ऐसा न होने पर विधेयक 1,000 रुपये का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखता है, अंडर ऐज वाहन चालकों का लाइसेंस रद्द करने के साथ ही अभिभावक/वाहन स्वामी को 25000 रुपये जुर्माना या 3 साल के कारावास के साथ दोषी माना जाएगा, हेलमेट न पहनने पर 1000 रुपये जुर्माना व ड्राइविंग लाइसेंस अयोग्य करार दिया जाएगा, लापरवाह ड्राइविंग के लिए सख्त दंड, और कानूनी उत्पीड़न से बेगुनाहों को बचाने के लिए भी प्रावधान होगा।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2016 में भारत में 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुई और सड़क दुर्घटनाओं में करीब 1.5 लाख लोगों की मौत हुई। लगभग 1,374 दुर्घटनाओं और 400 मौतें भारतीय सड़कों पर हर दिन होती हैं। जनवरी से मार्च 2017 की पहली तिमाही के अंतिम आंकड़े पिछले साल की तुलना में ज्यादातर राज्यों में मृत्यु और चोट के मामलों में मामूली कमी दिखाई देती हैं। जैसा कि सड़क सुरक्षा पर ब्राजीलिया घोषणा को अपनाते हुए भारत प्रतिबद्ध है। लिहजा ,साल 2020 तक 50 प्रतिशत तक सड़क दुर्घटनाओं को घटाने के सख्त कानून को घोषित करने की आवश्यकता है।
गौरतलब हो कि मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2017 को पिछले सत्र में लोकसभा से पारित किया जा चुका है, अब महज राज्यसभा द्वारा इसे मंजूरी मिलने कि देरी है।
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