मुरादाबाद में लाखों की ठगी कर फाइनेंस कंपनी फरार

कंपनी के विरुद्ध थाना सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कर पुलिस जांच में जुट गई है। इस मामले में मंगलवार को पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जिससे पूछताछ जारी है।

सिविल लाइंस क्षेत्र में एक चिटफंड कंपनी बना कर लोगों को कर्ज दिलाने का काम किया जा रहा था। चिटफंड कंपनी ने बाकायदा अपना ऑफिस भी खोल रखा था, जहां पर कई कर्मचारी इस काम को कर रहे थे। कंपनी अखबार में विज्ञापन दे कर केवल मार्क शीट और आधार कार्ड के जरिए आसान तरीकों से कर्ज दिलाने का दावा कर रही थी।

इसी झांसे में शहर के सैकड़ों लोग फंस गए और अपना लाखों रुपया डूबा दिया। आरोप है कि कंपनी ने सभी लोगों को रविवार को ऑफिस बुलाया और कर्ज का डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) देने की बात कही। इस दौरान डीडी देने से पूर्व सभी से 20 प्रतिशत कमीशन वसूल कर विजया बैंक का डीडी सौंप दिया गया। जब लोग इसे लेकर बैंक पहुंचे तो जानकारी मिली कि डीडी फर्जी है।

आनन फानन में लोग इसकी शिकायत लेकर जब फाइनेंस ऑफिस पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला और कर्मचारी लापता थे। अपने साथ हुए फ्रॉड की जानकारी होने पर थाना सिविल लाइंस में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है।

पीड़ित फाजिल ने बताया, “सिविल लाइंस के विल्सोनिया कॉलेज के पास एक फाइनेंस कंपनी थी, जो लोन दिलवाने का काम करती थी। हमें इस कंपनी के बारे में तब पता चला जब अखबार में विज्ञापन पढ़ा। इस कंपनी ने आधार कार्ड, मार्कशीट के आधार पर आसान तरीके से होम लोन दिलाने की बात कही थी, बिना किसी शुल्क के केवल छह प्रतिशत ब्याज पर। हमने ऑफिस में संपर्क कर अपने दस्तावेज जमा कर दिए थे। सभी कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी थी।”

उन्होंने कहा, “हमें रविवार को कर्ज का डीडी देने के लिए बुलाया गया था। इस दौरान हमें डीडी देने से पूर्व कर्ज की रकम से कमीशन के बीस प्रतिशत पहले ले लिया गया। दूसरे दिन जब हम बैंक पहुचे तो हमें पता चला की हमें दिया गया डीडी नकली है। हमने थाने में शिकायत की है।”

पीड़िता रजनी ने बताया, “हम अखबार में विज्ञापन पढ़ कर कंपनी पहुंचे और लोन दिए जाने की जानकारी ली। हमें बताया गया की हाईस्कूल की मार्कशीट या आधार कार्ड के जरिये छह प्रतिशत प्रतिवर्ष ब्याज पर लोन दिया जा रहा है, इसके अतिरिक्त कोई शुल्क नहीं लगेगा। जब हमने कागजी कार्रवाई पूरी कर ली और डीडी मिलने का समय आया तो हमसे लोन की राशि का 20 प्रतिशत शुल्क पहले ही ले लिया गया उसके बाद ही डीडी को दिया गया, जबकि इस बात पर बहस भी हुई थी। जब हम दूसरे दिन बैंक गए तो बैंक ने हमें बताया कि डीडी फर्जी है। इस संबध में सिविल थाने में शिकायत कर दी है।”

एएसपी रईस अख्तर ने मंगलवार को बताया, “मामले की जानकारी मिली है। इस संबंध में सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें एक नामजद आरोपी को पूछताछ के लिए सिविल लाइंस थाने लाया गया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है। मकान मालिक को बिना पहचान के किराए पर देने के मामले मेंदोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।”

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