असम के चिड़ियाघर में सफेद ‘अफ्रीकी गैंडे’ की मौत

गुवाहाटी, 19 जुलाई (आईएएनएस)। असम के एक चिड़ियाघर में एकलौते वृद्ध अफ्रीकी गैंडे की मौत हो गई। चिड़ियाघर के अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

मोहन नामक सफेद अफ्रीकी गैंडे की मंगलवार की रात मौत हो गई। उसे 1974 में अमेरिका से यहां 50,000 रुपये में लाया गया था।

चिड़ियाघर के विभागीय वन अधिकारी टी मैरिस्वामी ने यहां मीडिया से कहा, “उसकी मंगलवार की रात लगभग 11.30 बजे मौत हो गई। नर गैंडे की उम्र लगभग 47 वर्ष थी। एक गैंडे का सामान्य जीवनकाल 45 से 50 वर्ष के बीच होता है।”

चिडियाघर में सूत्रों के अनुसार, मोहन असम राज्य चिड़ियाघर में दर्शकों की भारी भीड़ को आकर्षित करने वालों में से एक था।

सफेद गैंडे वास्तव में सफेद रंग के नहीं होते हैं बल्कि साधारणतया हल्के भूरे से गहरे पीले रंग के होते हैं और उनके दो सींग होते हैं। इसके अगले हिस्से का सींग काफी लंबा होता है और इस सींग की लंबाई 150 सेमी तक होती है।

विशेषज्ञों ने कहा कि ‘सफेद गैंडा’ नाम अफ्रीकी शब्द ‘विज्ट'(सफेद की तरह आवाज) से आया है। जिसका मतलब विस्तृत होता है, जो इसके बड़े मुंह के संदर्भ में है।

सफेद गैंडे पृथ्वी पर निवास करने वाले सबसे ज्यादा जीवित रहने वाले जानवरों में से एक हैं। इनके शरीर की लंबाई 335 से 420 सेमी और पूंछ की लंबाई 50 से 70 सेमी होती है।

पिछले रविवार को इसी चिड़ियाघर में स्वाती नामक शेरनी की मौत हुई थी। किसी चिड़ियाघर में पाई जाने वाली यह देश की सबसे ज्यादा उम्र की शेरनी थी। स्वाती की 20 वर्ष की उम्र में मौत हुई थी। 1998 में जन्मी इस शेरनी को 2005 में गुवाहाटी लाया गया था।

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