राज्यपाल ने तिलक की प्रतिमा और आजाद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
लालबाग चौराहा स्थित आयोजित कार्यक्रम में नाईक ने कहा, “अपने जीवन का उत्सर्ग करने वाले ऐसे महान शहीदों के प्रति यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि हम स्वराज को सुराज में बदलें। देश को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक, समाज एवं सरकार की है।”
उन्होंने कहा “हमें यह संकल्प लेना होगा कि अपने देश के प्रेरणा स्तंभों के सपनों के देश का निर्माण करने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।”
नाईक ने कहा कि लोकमान्य तिलक और चंद्रशेखर आजाद ने अपने-अपने ढंग से देश की आजादी के लिए प्रयास किए। 100 साल पहले बालगंगाधर तिलक कांग्रेस के अधिवेशन में लखनऊ आए थे। यहीं उन्होंने कहा था कि ‘स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे पाकर रहूंगा’। अंग्रेजों ने बालगंगाधर तिलक को भारत में ‘असंतोष का जनक’ बताया था।
उन्होंने कहा कि देश आजाद हो, इसके लिए हर आदमी को जागृत करने के लिए बालगंगाधर ने गणपति महोत्सव एवं छत्रपति शिवाजी उत्सव का सार्वजनिक रूप से आयोजन शुरू किया। इसी ²ष्टि से उन्होंने दैनिक ‘केसरी’ मराठी में तथा अंग्रेजी में ‘मराठा’ जैसे समाचार पत्र भी शुरू किए। लोकमान्य तिलक के अग्रलेख पढ़ने योग्य एवं प्रेरणादायक होते थे।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम को बगावत बताया, जबकि वह देश की आजादी की शुरुआत थी।
नाईक ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने कम उम्र में ही गांधी जी से प्रभावित होकर स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख भूमिका निभाई। शहीद चंद्रशेखर आजाद का लखनऊ से गहरा नाता रहा। आजाद ने क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल व अन्य साथियों के साथ काकोरी में ट्रेन से अंग्रेजों के सरकारी खजाने को लूटकर देश को आजाद कराने का काम आगे बढ़ाया।
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