नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। भारत सरकार चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर चिंतित है और भारतीय वस्तुओं एवं सेवाओं की चीनी बाजार में अधिक पहुंच सुनिश्चित कराने के लिए प्रयास कर रही है।
नई दिल्ली, 24 जुलाई (आईएएनएस)। भारत सरकार चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर चिंतित है और भारतीय वस्तुओं एवं सेवाओं की चीनी बाजार में अधिक पहुंच सुनिश्चित कराने के लिए प्रयास कर रही है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा में कहा, “चीन के साथ व्यापार घाटा चिंता का विषय है। हम भारतीस वस्तुओं एवं सेवाओं की चीनी बाजार में अधिक पहुंच सुनिश्चित कराने के लिए चीन से चर्चा कर रहे हैं।”
सीतारमण ने कहा कि पिछले तीन सालों में भारत का जिन 25 देशों के साथ व्यापार घाटा है, उनमें चीन सबसे शीर्ष पर है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चीनी प्रशासन के साथ उच्चस्तर पर यह मुद्दा उठाया था।
सीतारमण ने लोकसभा में एक अलग लिखित जवाब में कहा, “विनिर्मित वस्तुओं, सेवाओं, बाजार पहुंच के मुद्दों के समाधान और अन्य गैर-टैरिफ बाधाओं पर जोर के साथ व्यापार बास्केट को विविधीकृत कर सकल निर्यात को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “यह द्विपक्षीय बैठकों और संस्थानिक संवादों के जरिए किया गया। भारतीय निर्यातकों को चीन में प्रमुख व्यापार मेलों में भारतीय उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।”
चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 2016-17 में मामूली घटकर 2015-16 के 52.69 अरब डॉलर से 51.08 अरब डॉलर हो गया था। यह 2014-15 में 48.48 अरब डॉलर था।
अप्रैल 2017 में चीन के साथ व्यापार घाटा 4.92 अरब डॉलर था।
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