नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। सरकार ने शुक्रवार को विदेश व्यापार नीति (एफटीपी) की समीक्षा के लिए विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) के विद्यार्थियों से सुझाव मांगे और कहा कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कार्यक्रम आज के दौर में सबसे अधिक प्रासंगिक हैं, क्योंकि संरक्षणवाद बढ़ रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था जकड़ रही है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमन ने यहां आईआईएफटी के 51वें दीक्षांत समारोह में कहा, “अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय और व्यापार कार्यक्रम आज की दुनिया में काफी महत्व रखते हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि वैश्वीकरण की सुखानुभूति से विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं को शुरू में लाभ पहुंचा, लेकिन धीरे-धीरे विभिन्न कारणों से अर्थव्यवस्थाओं को दिखाई देने लगा कि अमीर और गरीब के बीच की खाई कम नहीं हो रही है और आर्थिक समृद्धि अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ रही है, जिसके कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था जकड़ती जा रही है और विभिन्न रूपों में संरक्षणवाद बढ़ रहा है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि हालांकि विश्व स्तर पर रणनीतिक और राजनीतिक परस्पर प्रभावों का गहराई से अध्ययन किया गया है, वैश्विक आर्थिक परस्पर प्रभावों का विस्तृत अध्ययन और विश्लेषण करने की जरूरत है और ऐसी स्थिति में भारत के लिए अपनी क्षमता का विकास करने की काफी संभावना है।
उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय, व्यापार, अर्थशास्त्र और कानून की जानकारी के साथ बहुविषयक विशेषज्ञों को तैयार करने की जरूरत बताई, ताकि विश्व व्यापार समझौतों के संबंध में भारत की बातचीत में उनका योगदान मिल सके।
उन्होंने कहा कि आईआईएफटी के छात्र संस्थान में प्राप्त ज्ञान और कौशल बढ़ाकर इस क्षेत्र में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने इस साल सितंबर में जारी होने वाली प्रस्तावित विदेश व्यापार नीति 2015-20 के बारे में स्नातक छात्रों के सुझाव आमंत्रित किए।
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