यह आदेश न्यायाधीश नारायण शुक्ला तथा न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार द्वितीय की पीठ ने अमिताभ की अधिवक्ता डॉ. नूतन ठाकुर तथा प्रदेश सरकार के अधिवक्ता को सुनने के बाद पारित किया।
अमिताभ ने पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन तथा पूर्व प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पांडा पर आरोप लगाया था कि उन्होंने राजनैतिक दबाव में उनके निलंबन संबंधी मामले में अनेक फर्जी अभिलेख तैयार कराए, जिनके आधार पर उनका निलंबन दो बार विधिविरुद्ध तरीके से बढ़ाया गया। उनके द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने पर भी इसकी जांच नहीं की जा रही थी, जिसके बाद उन्होंने यह याचिका दायर किया था।
न्यायालय ने अमिताभ से कहा कि चूकि रंजन अब मुख्य सचिव नहीं हैं, अत: वे वर्तमान मुख्य सचिव को अपनी शिकायत दें और मुख्य सचिव उस पर गुण-दोष के आधार पर स्वयं उचित निर्णय लें।
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